बालाजी धाम की गौ सेवा पदयात्रा का झाबुआ में प्रवेश:सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ देवझिरी तक जाएगी

बालाजी धाम गड़ावदिया के पीठाधीश्वर श्रीधर बैरागी के सानिध्य में रविवार को दो दिवसीय पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा गौ सेवा और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ शुरू की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में जागरूकता लाना और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना है। यात्रा गड़ावदिया से शुरू होकर देवझिरी में समाप्त होगी। सुबह 11 बजे यात्रा के उत्साहपूर्वक शुभारंभ से पूर्व भक्तों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। रानीसिंग होते हुए यह यात्रा दोपहर 1 बजे झाबुआ जिले के भाभरापाड़ा में प्रवेश की। मार्ग में रानीसिंग, भाभरापाड़ा, घुघरी, गंगाखेड़ी और करवड़ में स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया। इस धर्म यात्रा में कथा प्रवक्ता वैष्णवी भट्ट (पेटलावद) और राधिका पोरवाल (बेरछा) प्रमुख रूप से सम्मिलित हुईं। बजरंग दल से सोनू डोडियार भी यात्रा का हिस्सा रहे। प्रकाश बैरागी शामगढ़ से पूरी श्रद्धा के साथ बजरंग बली की प्रतिमा को साथ लेकर चल रहे थे। यात्रा में जनप्रतिनिधियों और युवा नेताओं की भी बड़ी भागीदारी देखी गई। इनमें जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि जसवंतसिंह भाभर, सदस्य विक्रम मेडा, प्रतिनिधि कृष्णपाल सिंह गंगाखेड़ी, युवा नेता शैलेंद्रसिंह राठौर, शंकर राठौड़ और सुनील जानी शामिल थे। बड़ी संख्या में पदयात्री गौ माता के जयकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन का भी सहयोग मिला। धाम से रावटी पुलिस के सुरेंद्र गड़रिया यात्रा के साथ रहे। झाबुआ जिले की सीमा में प्रवेश करते ही एसडीओपी अनुरक्ति साबनानी और करवड़ चौकी प्रभारी प्रहलाद सिंह चुंडावत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद दिखे। यह यात्रा पेटलावद होते हुए थांदला के मेट्रो गार्डन पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा। रात्रि में एक दिव्य दरबार का आयोजन भी होगा, जिसमें पीठाधीश्वर द्वारा पर्चे के माध्यम से श्रद्धालुओं की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्ज दिलाने की मांग पंडित श्रीधर बैरागी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य प्रत्येक हिंदू परिवार को गौ सेवा के संकल्प से जोड़ना है। इसके साथ ही गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित करना भी इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है। यात्रा का समापन दूसरे दिन, 12 जनवरी को होगा। यह थांदला रोड, मेघनगर और झाबुआ शहर से होते हुए देवझिरी पहुँचेगी, जहाँ एक विशाल बालाजी भक्त समागम के साथ इसका समापन किया जाएगा।

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