खरगोन के होम स्टे पहुंचा नीदरलैंड का दंपती:पांच दिन ठहरे विदेशी मेहमान; बैलगाड़ी पर घूमे, दाल-बाटी खाकर बोले- वेरी टेस्टी

खरगोन जिले में नीदरलैंड के एक दंपती ने ग्रामीण जीवन और निमाड़ी संस्कृति का अनुभव किया। एरेना और पीटर नामक यह दंपती बोथू गांव स्थित एक होम स्टे में पांच दिनों तक ठहरा, जहां उन्होंने स्थानीय खानपान और गतिविधियों का आनंद लिया। अपने प्रवास के दौरान, दंपती ने निमाड़ी झूले का लुत्फ उठाया और ज्वार-मक्का की रोटी, दाल बाटी तथा अमाड़ी की भाजी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा- इट इज वैरी टेस्टी। उन्होंने नर्मदा नदी की सैर की और सहस्त्रधारा का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने किसानों से खेती-किसानी और पशु-पक्षियों के बारे में जानकारी ली। भोजन की खूब सराहना की
दंपती ने बैलगाड़ी पर गांव का भ्रमण किया और गोबर के उपले बनते देखकर उसे सीखा। उन्होंने उपलों के साथ तस्वीरें भी लीं। होम स्टे से लौटते समय, उन्होंने वॉयस गूगल ट्रांसलेट के माध्यम से मोबाइल पर गोदावरी बाई द्वारा तैयार किए गए भोजन की खूब सराहना की। युवाओं के आग्रह पर गोदावरी बाई ने भी उन्हें धन्यवाद दिया। नीदरलैंड की सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त यह दंपती भारत भ्रमण पर है। उन्होंने इस क्षेत्र में घूमने के लिए गूगल सर्च का उपयोग किया और बोथू स्थित होम स्टे तक पहुंचे। होम स्टे संचालक सागर पटेल ने बताया कि यह पहली बार था जब उनके यहां कोई विदेशी मेहमान ठहरा। मिट्टी का घर-शांत वातावरण पसंद आया
मेहमानों को मिट्टी का घर और गांव का शांत वातावरण विशेष रूप से पसंद आया। पीटर ने बताया कि उन्होंने दो बार नर्मदा नदी पार की और उन्हें यहां का भोजन बहुत पसंद आया। एरेना ने कहा कि उन्हें विलेज टूरिज्म काफी अच्छा लगा, खासकर बैलगाड़ी पर भ्रमण आनंददायक था और सुबह का सूर्योदय मनमोहक लगा। 22 होम स्टे बनाए गए हैं
खरगोन जिले में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 22 होम स्टे बनाए गए हैं। ये होम स्टे नर्मदा किनारे के बोथू और केरियाखेड़ी जैसे गांवों में स्थित हैं। वर्तमान में, इन स्थानों पर देश और प्रदेश के पर्यटक पहुंच रहे हैं।

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