राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के मौके पर श्योपुर शहर की चार प्रमुख बस्तियों—अंबेडकर, कबीर, स्वामी विवेकानंद और गुरु गोविंद सिंह बस्ती में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत कलश यात्राओं से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश रखकर गाजे-बाजे के साथ निकलीं। इस दौरान पूरा शहर धार्मिक रंग में रंगा नजर आया और चारों ओर भारी उत्साह देखा गया। इन सम्मेलनों में न सिर्फ भाषण हुए, बल्कि सामाजिक एकता का बड़ा उदाहरण भी पेश किया गया। कार्यक्रम के अंत में ‘सहभोज’ (सामूहिक भोज) का आयोजन किया गया, जहां सभी ने साथ बैठकर भोजन किया और ‘एक पंगत, एक संगत’ का संदेश दिया। वहीं, छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक प्रोग्राम और देशभक्ति के गीतों से समां बांध दिया, जिसमें भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। संतों और वक्ताओं ने सिखाया एकता का पाठ सम्मेलनों में शामिल हुए संतों और मुख्य वक्ताओं ने समाज से जात-पात और ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म कर एकजुट होने की अपील की। वक्ताओं ने ‘पंच परिवर्तन’ को अपने जीवन में उतारने और नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देने पर जोर दिया। अंबेडकर बस्ती के कार्यक्रम को खास तौर पर पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए ‘पॉलीथिन मुक्त’ रखा गया और उसे प्राकृतिक चीजों से सजाया गया था। शहर से लेकर गांवों तक गूंजा एकता का मंत्र आरएसएस के पदाधिकारियों ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहें। श्योपुर शहर के अलावा जिले के ग्रामीण इलाकों जैसे जैनी मंडल, गिरधरपुर, दोर्द और गोपालपुर में भी ऐसे ही सम्मेलन हुए। हर जगह मुख्य वक्ताओं ने हिंदू समाज को मजबूत करने और राष्ट्रहित में काम करने का संकल्प दिलाया।


