बुरहानपुर के ऐतिहासिक कुंडी भंडारा का मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम डेवलपमेंट वर्क कराएगा। यहां करीब 58.83 लाख की लागत से पार्किंग सहित अन्य व्यवस्थाएं जुटाई जाएगी। इसके लिए पर्यटन विकास निगम की ओर से टेंडर जारी किए गए हैं। बता दें कि बुरहानपुर का सदियों पुराना वाटर सप्लाई सिस्टम कुंडी भंडारा दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस कारण से नहीं कि यह 407 सात साल पुराना है, बल्कि इसलिए कि इतना पुराना होने के बाद भी रोज दो से सवा दो लाख लीटर शुद्ध पानी दे रहा है। इससे एक लाख की आबादी को वाटर सप्लाई होती है। इस अंडर वाटर सिस्टम को अब्दुल रहीम खान खाना के शासनकाल में 1615 ई. में बनाया गया था। खास बात यह है कि यह सिस्टम 80 फीट गहराई में बना है। यह है कुंडी भंडारा का इतिहास तीन सोर्स से आता है पानी कुंडी भंडारा से दो से सवा दो लाख लीटर पानी रोज मिलता है। 80 फीट गहराई से पानी बिना किसी पंप आगे बढ़ता है। करीब 3.9 किमी की लंबाई में पानी आखिरी की 105 नंबर की कुंडी में आता है। यह सिस्टम गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के विपरीत काम करता है। पानी बहता हुआ नहीं दिखता है, बल्कि छतों से टपकता रहता है। पानी बढ़ता हुआ ड्रिप करता हुआ, छत से छूता हुआ शरीर पर बूंद के रूप में दिखता है। 105वीं कुंडी पर पहुंचने पर यह जमीन पर आता है। कौन हैं अब्दुल रहीम खानखाना, जिन्होंने बनवाया था कुंडी भंडारा
मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में बुरहानपुर एक प्रमुख सैनिक छावनी थी। सुप्रसिद्धि असीरगढ़ के किले से थोड़ी दूरी पर बुरहानपुर को दक्कन का द्वार माना जाता था। दिल्ली के सुल्तान इसी जगह से दक्कन के भू-भाग पर नियंत्रण के लिए सैन्य अभियान संचालित करते थे। असीरगढ़ के किले पर विजय के बाद अकबर ने अब्दुल रहीम खानखाना को बुरहानपुर का सूबेदार नियुक्त किया। वह एक मध्यकालीन कवि, सेनापति, प्रशासक, आश्रयदाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी और विद्वान थे, लेकिन सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसे इस शहर में पेयजल की भारी किल्लत थी। इसे दूर करने के लिए रहीम ने शहर के आसपास जल स्रोतों की तलाश शुरू कर दी। शहर से 6 किलोमीटर दूर सतपुड़ा की तलहटी में अब्दुल रहीम खानखाना को एक जल स्रोत मिला और उनके मन में इस जल को नगर तक पहुंचाने का विचार पलने लगा। रहीम ने इस कार्य के लिए अभियांत्रिकी में कुशल अपने कारीगरों से मशविरा किया और इस जल को नगर तक लाने के लिए सन 1612 ईं में जमीन से 80 फीट नीचे घुमावदार नहरों के निर्माण पर कार्य शुरू हो गया। दो साल तक अनवरत चले खनन कार्य और पत्थरों से चिनाई के बाद तीन किलोमीटर लंबी नहर के जरिए शुद्ध पेयजल को को सन 1615 ई में जाली करंज तक पहुंचाया गया। अब यह होगा काम
जारी टेंडर के अनुसार, यहां पार्किंग, पिंथ प्रोटेक्शन स्टोन पिचिंग कुंडी, पार्किंग एरिया मुख्य द्वार, शौचालय, पानी की व्यवस्था, डिस्प्ले बोर्ड आदि कार्य 58.83 लाख की लागत से होंगे।


