ईओडब्ल्यू को जांच देने की तैयारी:सहकारी बैंकों में 150 करोड़ का केसीसी घोटाला किसानों के नाम पर फर्जी लोन लेकर निकाला पैसा

सहकारी बैंकों में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन के नाम पर 150 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया है। समितियों ने किसानों के नाम पर फर्जी लोन लिया। फिर बैंक के अफसरों से मिलीभगत कर उनके लोन की राशि बचत खाते में भेजी। इसके बाद कुछ खातों से राशि को म्यूल खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। कुछ राशि को फर्जी बाउचर भरकर कैश भी निकाल लिया गया। अभी ऐसे मामले भिलाई, सारंगढ़ की ब्रांच में पकड़ में आए हैं। अंबिकापुर में भी 50 करोड़ की शिकायत मिली है। वहीं बरमकेला ब्लॉक में 9 महीने की जांच करवाई गई तो वहां 10 करोड़ का गबन पकड़ा जा चुका है। तीन साल की जांच में यह 30-35 करोड़ से ऊपर जाने की संभावना है। वहीं बाकी ब्रांचों में 70 करोड़ के गबन भी प्रथम दृष्टया पकड़ में आ चुके हैं। अपेक्स बैंक के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता सभी ब्रांच के तीन साल के रिकॉर्ड का स्पेशल ऑडिट करवा रहे हैं। जिसमें संदिग्ध ट्रांजेक्शन को किसानों से वेरिफाई भी किया जाएगा। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि यह मामला 200 करोड़ रुपए से भी अधिक का जाएगा। अब इस मामले को ईओडब्ल्यू को सौंपने की तैयारी है। अपेक्स बैंक ने जांच के लिए फाइल को सचिव के पास भेज भी दिया है। ऐसे पकड़ में आया मामला अपेक्स बैंक हेड ऑफिस में बरमकेला ब्लाक ब्रांच की गड़​बड़ियों की शिकायत मिली। तीन अफसरों को 1 अप्रैल 2024 से नवंबर 2024 तक के सभी रिकॉर्ड जांचने के लिए ब्रांच में भेजा गया। उन्होंने पहले ही दिन दो संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़े। दो किसानों के खाते से 50-50 हजार रुपए एसबीआई खाते में भेजे गए थे। दो दिन में ही करीब 56 लाख रुपए इसी तरह के निकाले गए थे। जब किसानों से पूछा गया कि लोन आपने लिया है तो उन्होंने मना कर दिया। ब्रांच ने जब सभी समितियों की जांच की तो बड़े नवापारा, बरमकेला, बोंदा, दुलोपाली, लेंन्ध्रा सहित 17 समिति में गड़बड़ी पाई गई। 887 खातों से 10 करोड़ रुपए अफसरों ने पार कर दिए थे। दिसंबर 2025 में अपेक्स बैंक अध्यक्ष ने सभी ब्राचों की तीन साल के रिकॉर्ड की जांच के आदेश दे दिए हैं। ऐसे समझें कैसे होता था पूरा खेल यह है नियम: सहकारी बैंक की ब्रांच में किसानों के तीन तरीके के खाते हैं। पहला बचत, दूसरा डीएमआर(डिजिटल मेंबर रजिस्टर) और तीसरा केसीसी। जब किसी किसान को केसीसी लोन लेना होता है तो वह समिति में आवेदन करता है। समिति उसे बैंक में भेजती है। बैंक उसकी ऋण पुस्तिका में दर्ज जमीन के हिसाब से लोन पास करती है। यह राशि समिति के खाते में आती है। समिति किसान के केसीसी खाते में भेजता है। बैंक लोन को डीएमआर में क्रेडिट कर देती है। फिर राशि बचत खाते में भेज दी जाती है। ऐसे किया गबन: जो किसान लोन नहीं लेते हैं या अनपढ़ हैं, उनको ही समिति वालों ने निशाना बनाया। ऐसे किसानों को खोजा जिन्होंने मोबाइल नंबर बदल लिए हैं। समिति ने ऐसे लोगों के नाम से लोन का आवेदन खुद के पास जमा किया। किसान की ऋण पुस्तिका लगाकर बैंक में आवेदन किया। पैसा समिति के खाते में आया और फिर उसे किसान के केसीसी खाते में भेज दिया। अब बैंक अफसरों से मिलकर पहले इस राशि को डीसीएमआर खाते में भेजा और फिर बचत खाते में। फर्जी बाउचर तैयार कर पैसों को निकाल लिया। लोन में खेल के पीछे की यह है वजह
केसीसी लोन को चुनाव के समय माफ करने का वादा किया जाता है। 2018 में कांग्रेस ने इस वादे को निभाते हुए लोन माफ भी किए थे। यही वजह है कि अफसर और समिति को लगता है कि किसानों को पता नहीं चलेगा और उनके नाम से लोन लेकर पैसा गबन कर लिया जाए। 250 खातों से 79 लाख गायब
दिसंबर 2025 में भिलाई-3 में 250 किसान ब्रांच पहुंचे और उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खाते में 79 लाख रुपए गबन हो गया है। इन किसानों ने लंबे समय से अपने खाते से कोई राशि नहीं निकाली थी। जब वे राशि निकालने पहुंचे तो खाते में राशि गायब थी। गबन की मिल रहीं शिकायतें
सहकारी बैंकों में लगातार गबन-घोटाले की शिकायतें आ रही है। इस मामले में एक जगह की जांच में गबन पकड़ में भी आया हैं। सभी ब्रांच की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। – केदारनाथ गुप्ता, अध्यक्ष, अपेक्स बैंक

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