भास्कर न्यूज | संगम जिले के छोटेबेठिया थानांतर्गत ग्राम आलदंड में ग्रामीण के साथ पुलिस द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। ग्रामीणों व आदिवासी संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसी बीच क्षेत्र के कई गांव में सामाजिक बैठकें आयोजित कर नक्सलियों से जंगल छोड़ सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेने मुख्यधारा में लौटने अपील भी की जा रही है। जानकारी के अनुसार आलदंड निवासी दसरू पद्दा वन विभाग के लिए बांस कटाई करने जंगल गया था। 5 जनवरी को गश्त में निकले सुरक्षा बलों ने पूछताछ के नाम रोका और नक्सल सहयोगी होने का संदेह जताते मारपीट किया। पूछताछ के दौरान नाक में पानी डाल प्रताड़ित करने का आरोप है। परिजनों ने दसरू पद्दा को इलाज के लिए बांदे अस्पताल में भर्ती कराया जहां उपचार जारी है। छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के कंदाड़ी, आलदंड, आमाटोला, हिदूर, घोड़िया, खैरीपदर, कोपिनगुंडा, राजामुंडा, कलपर लंबे समय से नक्सल संवेदनशील रहे हैं। सर्व आदिवासी समाज छोटेबेठिया इकाई अध्यक्ष अजीत नरेटी ने कहा कि भविष्य में किसी भी निर्दोष आदिवासी के साथ इस प्रकार की घटना न हो। नक्सलवाद के नाम पर आदिवासियों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। कंदाड़ी सरपंच मैनी कचलामी, ग्रामीण गज्जू पद्दा ने भी मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। मारपीट का आरोप गलत केवल पूछताछ की गई पखांजुर एसडीओपी रवि कुजूर ने बताया कि दसरू पद्दा को जंगल में केवल पूछताछ के लिए रोका गया था। किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई। सुरक्षा बल नक्सल उन्मूलन के लिए अभियान चला रहे हैं। ग्रामीणों से अपील है वे जंगलों में सक्रिय नक्सलियों को किसी भी प्रकार का सहयोग न करें। सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेकर नक्सली आत्मसमर्पण करें।


