नो मैपिंग वाले 5 हजार 267 वोटरों ने जो दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए हैं उनकी जांच ही चालू नहीं हो सकी है। अफसर नियुक्त होने के बाद भी जांच का सिस्टम नहीं बनने से ऐसी स्थिति बनी है। इसी कारण पेंडेंसी हर रोज बढ़ रही है। दूसरी तरफ मप्र व गोवा से कुछ दस्तावेज जांच के लिए ग्वालियर आ चुके हैं। वहीं नए नाम जुड़वाने या फिर संशोधन के लिए फॉर्म भर चुके आवेदनों का निराकरण न होने से प्रदेश स्तर पर नाराजगी जताई गई है। इनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें 45 दिन से ज्यादा हो गए हैं। गोवा में एक महिला ने प्रमाण के रूप में वहां सुनवाई के दौरान बहोड़ापुर के स्कूल से जारी टीसी दी। इसमें वर्ष 1976 में कक्षा-1 में प्रवेश और 9 साल बाद 1985 में कक्षा-3 पास करने का उल्लेख है। अफसर इसे संदिग्ध मान रहे हैं। अशोकनगर के कर्मचारी ने केंद्र सरकार का फोटो परिचय पत्र और उज्जैन, छिंदवाड़ा से दो अंक सूची भी जांच के लिए ग्वालियर आई हैं। इनमें एक कक्षा 8 की और दूसरी कक्षा 10 की। अधिकारियों ने कहा कि ये दस्तावेज संबंधित अधिकारियों के पास भेज दिए गए हैं। नहीं सुधरी फॉर्म डिस्पोजल, लॉजिकल एरर की स्थिति पिता के 2.36 लाख नाम मिसमैच: लॉजिकल एरर का आंकड़ा आज भी 3 लाख 21 हजार से अधिक है। इनमें सर्वाधिक 2 लाख 36 हजार 874 वोटर ऐसे हैं जिनके पिता के नाम मिस मैच हो गए हैं। बाकी में 44 हजार 269 पिता-पुत्र में 15 साल से कम अंतर और 10 हजार 819 पिता ऐसे हैं जिनकी उम्र में बच्चों से 50 साल से अधिक दिख रहा है। बीएलओ सहित पूरी टीम सुनवाई, फॉर्म समेटने में लगी है इसलिए यह पेंडेंसी कई दिन से स्थिर है। फॉर्म भरने के बाद भी नहीं जुड़े नाम: नए नाम जुड़वाने के 10 हजार 504 फॉर्म में से 80 फीसदी आज भी पेंडिंग हैं। दूसरी तरफ जेंडर रेशो बढ़ाने अफसर लगातार निर्देश दे रहे हैं। रविवार को भी वर्चुअल बैठक हुई। इसमें ग्वालियर विधानसभा में 995 और ग्वालियर दक्षिण में 798 फॉर्म ऐसे मिले हैं जिन्हें भरे हुए 45 दिन से ज्यादा हो गए हैं पर निराकरण नहीं हुआ है। अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद ने कहा कि इनके निराकरण के लिए कहा गया है।


