ग्वालियर में साइबर फ्रॉड:IPS-CBI अफसर बन रिटायर्ड रजिस्ट्रार को 31 दिन रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’, 1.12 करोड़ ठगे

ग्वालियर में रिटायर्ड रजिस्ट्रार के साथ बड़ी साइबर ठगी हुई है। ठगों ने खुद को IPS और CBI अधिकारी बताकर बुजुर्ग को फोन किया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर डराया और अपने जाल में फंसा लिया। ठगों ने बुजुर्ग को 31 दिन (16 नवंबर से 17 दिसंबर) डिजिटल अरेस्ट रखा। ठगों ने बुजुर्ग से 1.12 करोड़ रुपए अपने चार बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। पैसे लेने के बाद ठगों ने मोबाइल नंबर बंद कर लिया। कुछ समय बाद बुजुर्ग ने मोबाइल पर डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अन्य वीडियो देखे तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की। 11 जनवरी को साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। ओल्ड खेड़ापति कॉलोनी निवासी बिहारीलाल गुप्ता (75) रिटायर्ड रजिस्ट्रार हैं। उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं। बेटा विदेश में है, जबकि बेटियां ससुराल में हैं। घर में बिहारी लाल और उनकी पत्नी ही रहते हैं। TRAI अधिकारी बनकर किया पहला फोन… 16 नवंबर को ठगों ने पहला कॉल किया। ठग ने अपना नाम रोहित शर्मा और TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी बताया। ठग बोला- दिल्ली पुलिस के आदेश पर मोबाइल नंबर व आधार कार्ड बंद होने वाला है। वीडियो कॉल में वर्दी देख फंसते गए बुजुर्ग रोहित ने बुजुर्ग को डराते हुए कहा कि उनके खिलाफ अरेस्ट ऑर्डर जारी हो चुका है और थोड़ी देर में एक आईपीएस अधिकारी उनसे बात करेगा। कुछ देर बाद बुजुर्ग के वाट्सएप पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम नीरज ठाकुर बताया और वह पुलिस की वर्दी में था। नीरज ने कहा कि संदीप कुमार नाम का व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा है, जिसने पूछताछ में बताया है कि उसने बिहारी लाल को 2 लाख रुपए दिए थे। उसी रकम से आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुलवाकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। यह सुनते ही बुजुर्ग घबरा गए। डराकर पूरी जानकारी निकलवाई : ठग ने बुजुर्ग को फोन काटने से मना किया और डराता रहा। उनकी निजी जानकारी, बैंक खाते, संपत्ति और म्यूचुअल फंड निवेश की पूरी जानकारी ली। इसके बाद गिरफ्तारी की धमकी दी। प्री-इन्वेस्टिगेशन का झांसा : ठगों ने कहा कि वे बुजुर्ग हैं, इसलिए उन्हें प्री-इन्वेस्टिगेशन का मौका दिया जाएगा। इसके लिए कथित सीबीआई अधिकारी प्रदीप सिंह को आवेदन देना होगा। ठगों ने आवेदन लिखवाकर वाट्सएप पर मंगवाया। ठग बोला- प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश हैं, यह जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए वीडियो कॉल पर फर्जी अरेस्ट ऑर्डर दिखाया। ठगों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश हैं कि यह जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए, वरना मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़े गए संदीप की जांच प्रभावित होगी। RBI में पैसा जमा कराएंगे जांच के बाद मिल जाएगा
आईपीएस अधिकारी की वर्दी पहने ठग ने कहा कि जांच के लिए उन्हें अपनी पूरी रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में जमा करानी होगी। जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस मिल जाएगा। ठगों ने चार खातों में ट्रांसफर कराए 1.12 करोड़
ठगों के कहने पर बुजुर्ग ने अपने एसबीआई खाते से 60 लाख रुपए, पत्नी के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 52 लाख रुपए चार अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए। आईसीआईसीआई बैंक 30 लाख, इंडसइंड बैंक 30 लाख, इंडसइंड बैंक (दूसरा खाता) 30 लाख और यूको बैंक में 22 लाख रुपए भेजे। ठगों ने कहा कि RBI द्वारा रकम और खातों की जांच की जा रही है और अगर पैसा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा नहीं होगा तो वापस कर दिया जाएगा।
RBI की फर्जी रसीद भेजी
पैसे ट्रांसफर होने के बाद ठगों ने वाट्सएप पर RBI की सील लगी फर्जी रसीद भी भेजी। इसके बाद अचानक फोन काट दिया गया। जब बुजुर्ग ने दोबारा कॉल किया तो सभी नंबर बंद मिले। ठग रोज पांच घंटे करते थे बात
ठगों ने 16 नवंबर से 17 दिसंबर तक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट रखा। रोज बुजुर्ग से वीडियो कॉल और फोन पर करीब पांच घंटे तक बात करते थे। वे इतना डराते थे कि बुजुर्ग किसी को कुछ बता ही नहीं पाए। बुजुर्ग ने बताया कि उन्हें हर समय गिरफ्तारी का डर सताता रहता था। सुबह होते ही ठगों का फोन आ जाता था और वे पूछते थे कि कहीं किसी को बताया तो नहीं। बुजुर्ग को डर था कि अगर उनकी गिरफ्तारी हुई तो समाज में उनकी बदनामी होगी। पुलिस-CBI बनकर कॉल करने वालों से रहें सतर्क
साइबर क्राइम टीआई धर्मेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि कोई भी अधिकारी चाहे वह पुलिस, CBI, RBI, TRAI या अन्य सरकारी विभाग का हो फोन पर गिरफ्तारी या जांच के नाम पर पैसे जमा कराने को नहीं कहता। यदि डराने-धमकाने वाली कॉल आए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर थाने में शिकायत करें।

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