इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब पूरे प्रदेश में शहरी इलाकों में पानी और सीवेज लाइन की जांच होगी। अभियान में घनी आबादी वाले और पुरानी सप्लाई वाले इलाकों में मौजूद पानी, सीवेज की पाइपलाइन और इंटरसेक्शन वाले क्षेत्रों की ऑनलाइन मैपिंग की जाएगी। निगम क्षेत्रों में सीवर लीकेज या ब्लॉकेज जांचने पाइपलाइन में रोबोट की मदद ली जाएगी। आयुक्त, नगरीय प्रशासन संकेत एस भोंडवे ने रविवार को वीसी से प्रदेश भर के अमले के साथ समीक्षा की। इसमें बताया गया कि इंदौर की घटना के बाद से अब तक प्रदेश भर में 1176 लीकेज दुरुस्त किए गए हैं, 7619 पानी के नमूनों की लेकर जांच हुई है और 684 जगहों पर ओवरहेड टैंक -भूजल स्रोतों की सफाई की गई है। कुल 1650 मरम्मत के का म हुए हैं। टेस्टिंग के लिए 704 लोगों को ट्रेनिंग दी गई है। लगभग 36 हजार किमी नेटवर्क लाइन की जियो टैगिंग हुई नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अमृत रेखा ऐप में अब तक एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरी इलाकों (16 नगर निगम सहित) 22800 किमी पानी की और 13274 किमी सीवेज लाइन की जियो टैगिंग की जा चुकी है। भोपाल में लगभग 4500 किमी पानी तो 1770 किमी सीवेज लाइन है। प्रदेश के काफी इलाकों में घनी आबादी या पुरानी सप्लाई वाले क्षेत्रों में पानी, सीवेज लाइन और इनके इंटरसेक्शन वाली जगहों की ऑनलाइन मैपिंग हो चुकी है। तीनों ही क्षेत्र अलग-अलग रंगों से ऑनलाइन मैप में दिखेंगे। ये डाटा अभियान के तहत मैदानी अमले को दिया जाएगा। अभियान के अंत तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग का लक्ष्य है। जल्द एक लाख से कम आबादी वाले निकायों में ये काम पूरा किया जाएगा। साथ ही पानी के सैंपल लेकर जियो टैग्ड फोटो अपलोड किये जाएंगे। वहीं, टंकियों की सफाई के बाद भी जियो टैग्ड फोटो अपलोड होंगे, सफाई की तारीख व उसका फोटो भी अपलोड करेंगे। 400 से अधिक शिकायतों का समाधान इंदौर की घटना सामने आने के बाद से बीते 10 दिनों में सीवर लाइन लीक और मेनहोल ओवरफ्लो की कुल 285 शिकायतें मिली, जिनमें से 134 का समाधान किया जा चुका है। पानी से जुड़ी 293 शिकायतें मिलीं जिनमें से 284 का समाधान कर दिया गया है। आयुक्त ने अमले को निर्देश दिए कि 31 मई तक चलने वाले अभियान के तहत गूगल शीट में मैदानी अमला रोजाना के कामों की रिपोर्ट डायरेक्टरेट को भेजेगा। अभी खुदाई करनी पड़ती है भविष्य में नगर निगम क्षेत्रों में सीवर और पानी की लाइन में लीकेज-ब्लॉकेज ढूंढने के लिए पाइपलाइन में छोटे रोबोट उतारे जाएंगे। अभी कोई भी गड़बड़ी ढूंढने के लिए 100 -200 मी खुदाई करनी पड़ती है। जलापूर्ति नेटवर्क में पानी की बर्बादी रोकने के लिए उपयोग हो रहे सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन (स्काडा) का नेटवर्क बढ़ेगा।


