भाजपा के ही पार्षद बोले:बिना निगम की मिलीभगत के गायें कटना संभव नहीं

राजधानी के मॉडर्न स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले में अब शहर सरकार अपनों के ही बीच घिरने लगी है। भाजपा पार्षदों का भी कहना है कि बिना मिलीभगत के गायों का कटना संभव नहीं है। इस मुद्दे को वे 13 जनवरी यानी कल होने वाली परिषद की बैठक में जोर-शोर से उठाएंगे। भाजपा पार्षद भी हैरान हैं कि स्लॉटर हाउस को शुरू करने के लिए निगम ने इतनी गोपनीयता क्यों बरती। न तो परिषद को विश्वास में लिया और न ही शहर को बताया। भाजपा पार्षद अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कर रहे हैं, लेकिन अभी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि परिषद में ही इस मुद्दे पर चर्चा कराएंगे। सवाल: मांस 640 गायों के बराबर, फुटेज में 85 भैसें नजर आ रहीं हिंदू संगठनों ने 17 दिसंबर को स्लॉटर हाउस से निकला ट्रक पकड़ा था। इसमें 26 टन मांस मिला था। यह 640 गायों के मांस के बराबर था। निगम का दावा है कि उस दिन स्लॉटर हाउस में सिर्फ 85 भैसें थी। डॉक्टर ने भी इतनी ही भैंसों के काटे जाने की पुष्टि की थी। यही सीसीटीवी कैमरों के फुटेज निगम ने पुलिस को सौंप दिए हैं। सवाल है कि गायों का मांस ट्रक में कहां से आया। ट्रक में इतना मांस कहां से आया, इसका जवाब कौन देगा शहर में गायें कटना बहुत गलत है। इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाना चाहिए। यह पूरा खेल बिना मिलीभगत के होना संभव नहीं है। परिषद की बैठक में हम इस पर गंभीर चर्चा और जांच की मांग रखेंगे।
-पप्पू विलास, पार्षद वार्ड-34
पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंप दिए हैं। इसमें घटना के दिन 85 भैंसें दिख रही हैं। इसके बाद भी ट्रक में इतना माल कहां से आया इसकी जांच पुलिस कर रही है। पुलिस रिपोर्ट के बाद स्लॉटर हाउस को सील कर दिया गया है। पुलिस की पूरी जांच रिपोर्ट आते ही हम जिम्मेदारों और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
-आरके सिंह, एमआईसी सदस्य, हेल्थ, स्वच्छ भारत मिशन प्रभारी
इस पूरे मामले में कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहिए। हम इस मुद्दे को परिषद में उठाएंगे। इसके लिए पटल पर अपनी बात रखते हुए दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग करेंगे।
-देवेंद्र भार्गव, भाजपा पार्षद वार्ड-12 निगम पर सवाल: गुपचुप संकल्प से कैसे दे दी गई हरी झंडी
स्लॉटर हाउस को लेकर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फरवरी 2022 में टेंडर और जून में वर्क ऑर्डर मिलने के बाद, यह प्रोजेक्ट दो साल तक गुपचुप तरीके से चलता रहा। फिर इसे कब शुरू कर दिया गया, किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। परिषद की चर्चा में कभी नहीं आया
प्रशासक काल में शुरू हुए इस टेंडर को दो साल के भीतर कभी भी परिषद के सामने चर्चा के लिए नहीं लाया गया। अधिकारियों ने इसे पूरी तरह इन-हाउस मामला बनाकर रखा। कंपनी को मनमानी की दे दी छूट
24 अक्टूबर 2025 को एमआईसी में समय सीमा बढ़ाने का एजेंडा लाया गया। इसके बाद संकल्प पारित कर कंपनी को अपनी सुविधा से काम शुरू करने की खुली छूट दे दी गई।

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