बारहमासी गीतों ने बांधा समां, दुकालू के जस और पूजा देशमुख की पंडवानी पर झूमे दर्शक

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव ब्लाक के ग्राम जेवरतला में मितान लोक महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। महोत्सव में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की प्रस्तुति और नयनाभिराम सतरंगी लोकनृत्यों ने आयोजन को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। मितान छत्तीसगढ़ी लोक कलाकर कल्याण संघ राजनांदगांव द्वारा सातवां मितान लोक महोत्सव का आयोजन ​किया गया। महोत्सव की शुरुआत सुरेगांव की पंडवानी गायिका पूजा देशमुख ने सरस्वती वंदना से की। उन्होंने पंडवानी में पांडवों के विराट नरेश के यहां अज्ञातवास बिताने के प्रसंग की शानदार प्रस्तुति दी। राजनांदगांव कीलोक गायिका पारखी महोबिया ने जस पचरा से शुरुआत की। उन्होंने ओढे चुनरिया लाली लाली ओ दाई डोंगरगढ़ वाली… और पंथी गीत दिया जले हो बाबा… प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ के देवी जस गायक दुकालू यादव ने अपनी लोकप्रियता के अनुरूप मोर गांव के शीतला दाई तोला बंदव ओ…, मोर गुरू महादेव…,लाली लाली तोर मांग के बिंदिया… और अंगारमोती मोर दाई ओ तोर अंगना न बरत हे ज्योति…जैसे प्रसिद्ध जस गीत प्रस्तुत कर आयोजन को नई ऊंचाई प्रदान की। छत्तीसगढ़ के सभी त्योहारों व परंपरा की झलक दिखी: लोक धारा के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक सोहर गीत से शुरू करते कर भरथरी, भोजली, जंवारा, देवी जस गीत, गौरा गीत, राऊत नाचा, सुआ गीत, गौरा गीत, पंथी और होली गीत की झलक दिखाई। इन प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को मंच पर जीवंत साकार किया। विवेक ने छत्तीसगढ़ी गीत स्वधारा की प्रस्तुति भी हुई मितान महोत्व का भव्य आयोजन देर रात तक जारी रहा। इसमें रायपुर के लोक गायक पंडित विवेक शर्मा ने मोर दुर्गा दुलौरिन दाई ओ तय पहुना बन के आबे, सोन मछरी ओ सोन मछरी, गीतों से समा बांधा। सुप्रसिद्ध लोक गायिका कंचन जोशी ने कई गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को प्रभावित किया। उनके प्रसिद्ध गीत मोर बर ले दे न राजा से दर्शक झूम उठे। स्वरधारा के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत किया।

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