राजस्थान में रोडवेज में कंडक्टरों की भारी कमी है। अब हालात ऐसे है कि विभाग को रिटायर्ड कंडक्टर को वापस बुलाना पड़ रहा है। राज्य के अलग-अलग 5 बडे़ शहरों समेत ज्यादातर डिपो में अब पुरानी टीम को वापस जा रहा है। रोडवेज की बसें खाली खड़ी न रहें, इसके लिए विभाग ने 34 शहरों के डिपो में खाली पड़े 250 पदों पर रिटायर्ड कंडक्टरों को फिर से काम पर रखने का फैसला किया है। इस बार काम के नियम इतने सख्त हैं कि इसे करना आसान नहीं होगा। इसके लिए रिटायर्ड कर्मचारियों को हर महीने 18 हजार रुपए की पक्की सैलरी मिलेगी, अगर उन्हें 4 हजार रुपए का एक्स्ट्रा बोनस चाहिए, तो बस की एक-एक सीट भरनी होगी। यानी बस में 100% सवारी होगी तभी बोनस मिलेगा। अगर सवारी 91% से कम रही, तो कोई बोनस नहीं दिया जाएगा। छुट्टी के अलावा ड्यूटी पर नहीं आने पर रोजाना एक हजार रूपए की पेनल्टी भी लगेगी। राज्य में सबसे ज्यादा कंडक्टरों की जरूरत उदयपुर में है, जहां 15 पद खाली हैं। जोधपुर, सीकर और सरदारशहर में भी 11-11 पदों पर भर्ती होनी है। जयपुर, नागौर और पाली जैसे शहरों में भी 10-10 कंडक्टरों की कमी चल रही है। उदयपुर डिपो के मैनेजर हेमंत शर्मा ने बताया कि यह नौकरी केवल 65 साल की उम्र तक के रिटायर्ड लोगों के लिए है। अगर किसी की उम्र इससे ज्यादा है, तो उसे डॉक्टर से फिट होने का सर्टिफिकेट लाना होगा और जयपुर हेड ऑफिस से मंजूरी लेनी होगी। अभी यह नौकरी सिर्फ एक साल के लिए है, अगर काम अच्छा रहा तो आगे भी रखा जा सकता है। सेवानिवृत परिचालक अनुबंध योजना के तहत यह भर्ती होगी। असल में रोडवेज विभाग नए लोगों को भर्ती करने के बजाय पुराने अनुभवी लोगों के भरोसे अपनी नैया पार लगाना चाहता है। लेकिन प्राइवेट बसों से मुकाबले के बीच बुजुर्गों के लिए 100% सवारी का टारगेट पूरा करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। घर से देने होंगे 35 हजार रुपए, छुट्टी की तो भारी जुर्माना
इस नौकरी को पाने के लिए इन बुजुर्गों को पहले अपनी जेब से पैसे जमा करने होंगे। 15 हजार रुपए गारंटी (सुरक्षा राशि) के और 20 हजार रुपए टिकट मशीन के लिए, यानी कुल 35 हजार रुपए जमा करने के बाद ही बस में चढ़ने का मौका मिलेगा। वर्दी और नाम की प्लेट का खर्चा भी खुद ही उठाना होगा। अगर बिना बताए छुट्टी की, तो एक दिन के 1000 रुपए काट लिए जाएंगे। 34 डिपो में 250 खाली पद भरेंगे रोडवेज में सबसे ज्यादा उदयपुर डिपो में 15 पद खाली हैं। इसके बाद जोधपुर, सीकर और सरदार शहर में 11-11 पद खाली हैं। जयपुर (वैशालीनगर), नागौर, पाली, अलवर और चित्तौड़गढ़ में 10-10 पद खाली हैं। भीलवाड़ा, बीकानेर और हनुमानगढ़ में 9-9 पद खाली हैं। ब्यावर और श्रीगंगानगर में 8-8 पद खाली हैं। डूंगरपुर, आबूरोड, बूंदी, कोटा, कोटपुतली और टोंक में 7-7 पद खाली हैं। डीडवाना, फलौदी और राजसमंद में 6-6 पद हैं। अजमेरु, अनूपगढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर, जालौर और झुंझुनूं में 5-5 पद खाली हैं। इसके अलावा अजमेर में 4 पद और चूरू, फालना व शाहपुरा में 3-3 पद खाली हैं।


