मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए ई-एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब ई-एफआईआर तो दर्ज होगी, लेकिन उस पर हस्ताक्षर करने के लिए शिकायतकर्ता को संबंधित थाने जाना अनिवार्य होगा। यदि शिकायतकर्ता एक महीने के भीतर थाने जाकर एफआईआर आवेदन पर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो ई-एफआईआर स्वतः निरस्त कर दी जाएगी। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने इस संबंध में सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य पुलिस इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं और इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह कार्रवाई एक लाख रुपए या उससे अधिक की राशि से जुड़े वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लागू होगी। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के जरिए राज्य साइबर पुलिस थाने में ई-एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था है। शुरुआती जांच के बाद ट्रांसफर होगी रिपोर्ट इस प्रकार की शिकायतें प्राप्त होने पर प्राथमिक परीक्षण के बाद उन्हें संबंधित जिलों को ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर ई-एफआईआर पर हस्ताक्षर करने के लिए थाने बुलाया जाएगा। यदि संबंधित व्यक्ति थाने नहीं पहुंचता है, तो 30 दिनों के भीतर ई-एफआईआर स्वतः निरस्त हो जाएगी। शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर होंगे अनिवार्य निर्देशों में यह भी कहा गया है कि ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच प्रक्रिया के तहत बैंक खातों को फ्रीज करना, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड), एसडीआर (सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड) प्राप्त करना और सीसीटीवी फुटेज एकत्र करना जैसी कार्रवाइयां की जाएंगी। यह सभी प्रक्रियाएं शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर के बिना भी की जा सकेंगी। गौरतलब है कि इससे पहले दो लाख रुपए या उससे अधिक की राशि के साइबर फ्रॉड मामलों को ही राज्य साइबर पुलिस थाने में दर्ज करने का प्रावधान था, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है।


