मध्य प्रदेश के मऊगंज में पुलिस का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां लौर और नईगढ़ी थानों में 1000 से अधिक मामलों में केवल 6 लोगों को गवाह बनाया गया। CCTNS पोर्टल पर रिकॉर्ड खंगालने के बाद यह मामला उजागर हुआ। मामला तब सामने आया जब लोगों की शिकायतों के बाद पुलिस रिकॉर्ड की जांच की गई। CCTNS पोर्टल में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ चुनिंदा नाम ही बार-बार सैकड़ों मामलों में गवाह के तौर पर दर्ज किए गए थे। इनमें दिनेश कुशवाहा, राहुल विश्वकर्मा, अरुण तिवारी और अमित कुशवाहा जैसे लोग शामिल हैं। थाने से जुड़े लोगों को सरकारी गवाह बनाए चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी कथित गवाह पुलिस थाने से जुड़े काम करते थे। इनमें थाना प्रभारी का ड्राइवर, रसोइया और अन्य करीबी लोग शामिल थे, जिन्हें सैकड़ों मामलों में ‘सरकारी गवाह’ बना दिया गया, जबकि उन्हें खुद नहीं पता था कि वे किस केस में गवाही दे रहे हैं। गवाहों ने बताया- कुछ मामलों में ही दस्तखत किए थे गवाह दिनेश कुशवाहा ने बताया कि उन्हें कुछ ही मामलों की जानकारी थी, बाकी केसों के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। उनके अनुसार, कई बार उनसे थाने में ही दस्तखत करा लिए गए और बाद में उनका नाम सैकड़ों केसों में गवाह के रूप में दर्ज हो गया। गवाह राहुल विश्वकर्मा ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने थाना प्रभारी के कहने पर दो-चार मामलों में दस्तखत किए थे, लेकिन अन्य मामलों में उनका नाम कैसे आया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। दिव्यांग व्यक्ति को 500 मामलों में बनाया गवाह सबसे चौंकाने वाला मामला अरुण तिवारी का है, जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं और ठीक से चल भी नहीं सकते। इसके बावजूद उन्हें ऐसी वारदातों का गवाह बनाया गया, जहां उनका पहुंचना असंभव था। वहीं, अमित कुशवाहा पर आरोप है कि वह थाना प्रभारी के तबादले के साथ ही दूसरे थानों में पहुंच जाता था और 500 से अधिक मामलों में सरकारी गवाह बन जाता था।


