‘अग्निवीर का विरोध देशभक्ति नहीं’:राज्यपाल बोले-इजरायल में 3 साल की मिलट्री ट्रेनिंग जरूरी,7 मिनट में हमला कर आ जाते हैं इजरायली

कोटा में भारत विकास परिषद कोटा महानगर द्वारा स्वामी विवेकानंद की 163 वी जन्म-जयंती पर सेवा संगम समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े शामिल हुए। कार्यक्रम में 31 संस्थाओं का सम्मान किया गया। राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने अपने संबोधन में इजराइल की देश भक्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इजराइली 2 हजार साल तक भटकते रहे। उनके पास जमीन नहीं थी, देश नहीं था। भारत के आजाद होने के 1 साल बाद इजराइल स्वत्रंत हुआ। लेकिन उनकी राष्ट्र के प्रति श्रद्धा व भक्ति बहुत है। सभी लड़के 12 वीं के बाद 3 साल मिलिट्री की ट्रेनिंग लेते हैं। लड़कियां के लिए भी ढाई साल की ट्रेनिंग अनिवार्य है। नहीं तो आगे एडमिशन नहीं मिलता। इतनी कठोरता से वहां शासन चलाते है। इजराइल के आसपास काफी देश है। लेकिन वो कभी डरते नहीं है। कभी पीछे नहीं हटते।समय आने पर 7 मिनट में हमला कर वापस आ जाते हैं। उनकी देशभक्ति के कारण उनका राष्ट्र इतना मजबूत हुआ। हमारे यहां तो अग्निवीर पर लोगों ने विरोध जताया। अग्निवीर की बात सेना से जुड़ी है। काफी सुझाव के बाद व स्टडी के बाद अग्निवीर लाए। ताकि हर गांव में 10-15 ऐसे बच्चे आएंगे तो गांव में सुधार हो। साथ ही 4 साल में उन्हें बीस लाख मिलेंगे। वो मिलिट्री, पुलिस या कहीं भी जॉब कर सकता है, या व्यवसाय कर सकता है। लेकिन उसका भी विरोध हुआ। हमारे लोगों ने इसका भी विरोध किया। ये राष्ट्र निष्ठा का प्रतीक नहीं है। राज्यपाल ने स्वामी विवेकानंद के जीवन पर प्रकाश डाला। राज्यपाल ने कहा कि विवेकानंद ने प्रमुख शिक्षाएं दी इनमें आत्मविश्वास, मानव सेवा, चरित्र, साहस, करुणा, एकाग्रता और निडरता और दृढ़संकल्प ,सकारात्मक सोच, सभी धर्मों का सम्मान थी। उन्होंने कई उपदेश दिए जिन्हें आत्मसात करने की जरूरत है। मैने पढ़ा है जब स्वामी जी तांगे पर स्कूल जाते थे। जब उनकी मां ने स्वामी जी से पूछा तुम क्या बनना चाहते हो। स्वामी जी ने तांगे वाला जैसा बनने को कहा। जिसके बाद मां ने उन्हें श्रीकृष्ण का चित्र दिया जिसमें कृष्ण अर्जुन के रथ के सारथी बनें हुए थे। मां ने कहा ऐसा बन जा। 1897 में बेंगलोर में उन्होंने भाषण दिया था कि आप 50 साल भारत माता की सेवा करो। 50 साल बाद 1947 में देश स्वत्रंत हुआ। विवेकानंद की दूर दृष्टि थी। अपने भाषण में स्वामी जी ने भारत के गौरवशाली इतिहास को बताया था। राज्यपाल ने कहा कि 1835 को मैकाले ने कहा था कि भारत के लोगों को ज्यादा दिन गुलाम नही बना सकेंगे। गुलाम रखना है तो शिक्षा पद्धति बदलो, इनको भूखे रखो। जबतक इनको भूखे नही रखेंगे तब तक भारतीय गुलाम नहीं रहेंगे। भारत में पहले खूब सोना था। लोग मंदिर में देव धर्म के लिए पैसे की जगह सोना चढ़ाते थे। 90 साल के बाद 1922 को अहमदाबाद में महात्मा गांधी ने भाषण में कहा कि अंग्रेजों ने हमें बहुत लूटा है, हमारे उद्योग धंधे बंद कर दिए,हमारे पास अनाज व पैसा नहीं लोग भूखे मर रहे हैं। स्वामी जी ने अपने भाषण में बोला था कि कट्टरता, सांप्रदायिकता, हठधर्मिता लंबे समय से पृथ्वी को जकड़े हुए हैं। कितनी ही बार ये धरती खून से लाल हुई। कितनी की सभ्यताओं का विनाश हुआ। ना जाने कितने देश नष्ट हुए। ये भयानक राक्षस अगर नहीं होते तो मानव समाज आज कही ज्यादा उन्नत होता। फरवरी 1568 में अकबर ने चित्तौड़ किले में 30 हजार लोगों का कत्लेआम किया। 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ में अधिकार के बाद लगभग 30 हजार हिंदुओं का कत्लेआम किया। ऐसा महा-भयानक राक्षस ही कर सकता है। राजस्थान के लोगों ने कितना सहन किया, कितना त्याग व बलिदान दिया। मेवाड़ ने ही रोका, इस कारण वो आगे नहीं जा सकें। इस बात का जिक्र हुआ या नहीं मुझे पता नहीं। लेकिन मैने पढ़ा है। स्वामी जी के विचारों से देश में ओर समृद्वि लाएंगे। आप देखते होंगे आज भी भयानक राक्षस मौजूद है। पाकिस्तान हो बांग्लादेश हो। बांग्लादेश में हर दिन हिंदुओं की हत्या की घटनाएं बढ़ रही है। जिंदा जला दिया, मारपीट की, उल्टा लटका दिया। यह राक्षसी प्रवृत्ति है।और ये जानबूझकर कर रहे हैं। लेकिन इसका भी उपचार करने की चर्चा की जरूरत है। उन्होंने मोदी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अपने यहां के कुछ लोगों को देश का विकास नहीं दिखता। 2014 से अभी तक भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ी। देश आत्मनिर्भर बन रहा है। विदेशियों को भी लग रहा है कि भारत आगे बढ़ रहा है।

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