‘मेरी सांसों में बसते तुम, तुम ही आधार गिरधारी’:विवेकानंद जयंती पर मीरा साहित्य संगम का आयोजन, कवियों ने किया काव्य पाठ

धौलपुर में अखिल भारतीय मीरा साहित्य संगम ने स्वामी विवेकानंद जयंती पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। शहर के जिरौली इलाके स्थित शिव शक्ति दरबार में हुई इस गोष्ठी में कवियों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और अन्य विविध विषयों पर काव्य पाठ किया। संस्था के अध्यक्ष और संयोजक विकल फर्रुखाबादी ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। उन्होंने अपनी रचना ‘तुम्हारी अर्चना के फूल मैले हो नहीं सकते, मैं अमल भावों की गंगा छोड़ आया हूं..’ प्रस्तुत की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने श्रृंगार के कई गीत और मुक्तक भी सुनाए। कवि वीरेंद्र त्यागी ने ‘हम आवारा स्वर हैं..’ शीर्षक से अपनी रचना प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने जिंदगी की जमीनी हकीकत को बयां किया। कवि मुकेश सिकरवार ‘दादा’ ने विवाहेतर प्रेम संबंधों पर आधारित अपनी रचना ‘नीले ड्रम से बात नीली साड़ी तक आ गई..’ सुनाई। कवि मुकेश गोस्वामी ने जीवन की कड़वी सच्चाई को दर्शाती अपनी रचना ‘थक कर बैठ जाने का नाम जिंदगी नहीं..’ प्रस्तुत की। कवयित्री रजनी शर्मा ने ‘मेरी सांसों में बसते तुम, तुम ही आधार गिरधारी..’ शीर्षक से अपनी रचना पेश की। इस काव्य गोष्ठी में गुलाब सिंह बघेल, नारायण सिंह गुर्जर, आशा विकल, भावना और सुष्मिता गोस्वामी ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

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