झुंझुनूं में बिजली उपभोक्ताओं और किसानों का आक्रोश फुट पड़ा है। ‘बिजली उपभोक्ता स्मार्ट मीटर हटाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले सोमवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। किसानों ने कहा कि वे स्मार्ट मीटर और बिजली क्षेत्र के निजीकरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। समिति ने आगामी 16 जनवरी को जिले की सभी तहसीलों पर बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। महापंचायत की अध्यक्षता फूलचंद ढेवा, विद्याधर सिंह गिल और पोकर सिंह झाझड़िया ने की। वक्ताओं ने केंद्र सरकार के बिजली सुधार कानून-2023 और प्रस्तावित 2025 विधेयक पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर प्रीपेड व्यवस्था लागू कर आम जनता और किसानों की जेब पर डाका डालने की तैयारी की जा रही है। इसे बिजली के पूर्ण निजीकरण की दिशा में एक सोची-समझी साजिश बताया गया। महापंचायत में पारित प्रमुख मांगें और प्रस्ताव समिति के प्रवक्ता रामचंद्र कुलहरि ने महापंचायत के समक्ष निम्नलिखित प्रस्ताव रखे, जिन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए और जो मीटर लग चुके हैं, उन्हें हटाया जाए। बिजली बिलों में राहत: घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए। कृषि श्रेणी में बदलाव का विरोध: फ्लेट रेट वाले कृषि कनेक्शनों को मीटर रेट श्रेणी में बदलने की कार्यवाही रोकी जाए और जिन्हें बदला गया है उन्हें पुनः फ्लेट रेट में लाया जाए। मुआवजा और सिंचाई: वर्ष 2022-23 में ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों का बकाया मुआवजा दिया जाए और यमुना नहर का पानी जल्द झुंझुनूं लाया जाए। मुकदमे वापसी: स्मार्ट मीटर का विरोध करने वाले उपभोक्ताओं पर दर्ज ‘झूठे’ मुकदमे वापस लिए जाएं।
प्रशासनिक वार्ता महापंचायत के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य अभियंता से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। कार्यवाहक मुख्य अभियंता ने मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया है।
महापंचायत में शामिल प्रमुख नेता आज के आंदोलन में पूर्व जिला उप प्रमुख कामरेड विद्याधर गिल, फूलचंद बर्बर, रामचंद्र कुलहरि, राजेश बिजारणियां, ओमप्रकाश झारोड़ा, बजरंग लाल एडवोकेट, इंद्राज सिंह चारावास, राजेन्द्र फौजी, महीपाल पूनिया, मदन सिंह यादव, और इमरान बड़गुर्जर सहित बड़ी संख्या में किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।


