भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य और पद्मश्री सम्मानित किसान हुकुमचंद पाटीदार ने कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए हैं। झाबुआ में मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी देश में कोई स्पष्ट कृषि नीति नहीं बन पाई है। पाटीदार ने कृषि के लिए ठोस नीति के अभाव को इस क्षेत्र की उपेक्षा का कारण बताया। पाटीदार ने केंद्र सरकार की सब्सिडी नीति पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों को साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है। ये कंपनियां अपना मुनाफा तय कर खाद और बीज की कीमतें निर्धारित करती हैं। उन्होंने किसानों से बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अपना बीज स्वयं तैयार करने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया, ताकि वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव से मुक्त हो सकें। जैविक खेती के लिए 2019 में पद्मश्री से सम्मानित पाटीदार वर्तमान में जैविक आयाम के प्रभारी के रूप में मालवा प्रांत के 18 जिलों के दौरे पर हैं। उन्होंने अब तक छह जिलों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को समझा है। इस दौरान किसानों ने घोड़ारोज के आतंक और अन्य कई गंभीर चुनौतियों का उल्लेख किया। इस चर्चा के दौरान भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत सहसंगठन मंत्री दिनेश शर्मा, मध्य प्रदेश के प्रदेश मंत्री राजेंद्र शर्मा, झाबुआ जिला प्रभारी महेश ठाकुर, धार जिला मंत्री अमोल पाटीदार, कैलाश डोडिया, झाबुआ जिला अध्यक्ष बचूसिंह मेडा, जिला मंत्री वरदीचन्द पाटीदार और युवा वाहिनी के जिला संयोजक पंकज सिंगाड सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में सरकार द्वारा कृषि के साथ किए जा रहे भेदभाव और किसानों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।


