गर्मी की उड़द और मूंग फसलों के उपार्जन के बाद महीनों से भुगतान न मिलने से परेशान किसानों ने सोमवार को एक पत्रकार वार्ता आयोजित की। इस दौरान किसानों ने प्रशासन और संबंधित समितियों पर भुगतान में भेदभाव करने का आरोप लगाया। किसानों ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा गड़बड़ी पाए जाने पर जिन समिति प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, उनसे जुड़े किसानों को भुगतान कर दिया गया है। वहीं, वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों का भुगतान अभी भी लंबित है। किसान अभय प्रताप सिंह ने बताया कि लगभग 55 से 60 किसानों का 2100 क्विंटल उड़द और मूंग का भुगतान अभी तक बकाया है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को पहले ‘फर्जी’ बताया गया था, उनकी जांच पूरी हो चुकी है और उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। उपार्जन के चार से पांच महीने बीत जाने के बाद भी भुगतान न मिलने से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खेती से जुड़े खर्च, कर्ज और घरेलू जरूरतों को पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। किसानों ने मांग की है कि यदि सरकार भुगतान नहीं कर सकती तो उनका फसल वापस किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों से उन्हें जांच की बात कहकर गुमराह किया जा रहा है, जबकि शासन द्वारा घर-घर जाकर जांच पहले ही पूरी की जा चुकी है। किसानों के अनुसार, प्रशासन ने कहा है कि जिन कर्मचारियों ने गड़बड़ी की थी, उनकी संपत्ति कुर्क करके किसानों को भुगतान किया जाएगा। हालांकि, किसानों ने इस समाधान पर असंतोष व्यक्त करते हुए इसे ‘न्याय’ के विपरीत बताया है। किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।


