गुजरात के सूरत शहर में ऑटो चलाकर परिवार का पेट पालने वाले भिंड जिले के दीखतनपुरा गांव निवासी अनिल बघेल करीब एक साल पहले पत्नी और बेटे के साथ गांव लौटे थे। करीब एक हजार किलोमीटर का सफर उन्होंने खुद ऑटो चलाकर तय किया। लगभग दो दिन की यात्रा के बाद परिवार सुरक्षित गांव पहुंचा। कुछ दिन गांव में शांति और सुकून के साथ बीते, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सुकून साबित होगा। 17 दिसंबर 2024 की शाम करीब चार बजे अनिल के ढाई साल के बेटे गणेश की अचानक तबीयत बिगड़ गई। अनिल और पत्नी आरती घबराकर बच्चे को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इलाज के बाद रात करीब 10 बजे डॉक्टरों ने बच्चे की हालत में सुधार बताया। रात अधिक हो चुकी थी, इसलिए अनिल ने उसी समय गांव लौटने का फैसला किया। अनिल पत्नी और बेटे के साथ ऑटो से ग्वालियर-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर आगे बढ़े। बरोही थाना क्षेत्र में पीछे से आए तेज रफ्तार डंपर ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि अनिल, उनकी पत्नी आरती और मासूम गणेश की मौके पर ही मौत हो गई। आए दिन ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर हो रहे ऐसे हादसों के कारण भिंड के लोग इसे अब मौत का रास्ता बताने लग हैं। दैनिक भास्कर टीम ने जब इस हाईवे के हादसों और मौतों के आंकड़ों की पड़ताल की तो बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले देखिए…ग्वालियर-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर हादसे की तीन तस्वीरें… 7 साल में 1400 से ज्यादा जानें गईं
भिंड जिले की सीमा में आने वाले इस हाईवे पर सात साल में करीब 1400 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इस दौरान चार हजार से अधिक सड़क हादसे हुए, जबकि 5156 लोग घायल हुए हैं। ग्वालियर से इटावा तक इस हाईवे की कुल लंबाई 110 किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 80 किलोमीटर हिस्सा भिंड जिले में आता है। चिंताजनक तथ्य यह है कि इसी 80 किमी के दायरे में सात साल के भीतर 1403 मौतें दर्ज की गई हैं। आंकड़ों काे देखें तो हर आधा किमी का हिस्सा एक संभावित ब्लैक स्पॉट बन चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात सुधारने के बजाय ब्लैक स्पॉट कम होने के सरकारी दावों पर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का आरोप है कि असल स्थिति को छिपाया जा रहा है, जबकि पूरा हाईवे लगातार डेंजर जोन में तब्दील होता जा रहा है। ब्लैक स्पॉट घटाने के दावे, लेकिन हादसों में लगातार इजाफा
सरकार की ओर से दावा किया जाता रहा है कि तीन साल में NH-719 पर 16 ब्लैक स्पॉट में सुधार किया गया है। अब केवल छह ब्लैक स्पॉट बचे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग है। आंकड़े बताते हैं कि इस हाईवे पर हादसों और मौतों का ग्राफ हर साल बढ़ता ही जा रहा है। असल में ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 तकनीकी रूप से पूरी तरह फेल हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मार्ग पर रोजाना करीब 20 हजार वाहन गुजरते हैं, जबकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी के मानकों के अनुसार, किसी टू-लेन हाईवे पर यदि 10 से 12 हजार से ज्यादा वाहन चलने लगें तो उसे फोर लेन में बदला जाना जरूरी होता है। नियमों के मुताबिक, फोर लेन पर भी जब वाहनों की संख्या 20 हजार से अधिक हो जाती है, तब सिक्स लेन की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद NH-719 आज भी टू-लेन ही बना हुआ है। सहालग और त्योहारों के दिनों में वाहनों का दबाव और बढ़ जाता है, जिससे यह हाईवे हर दिन एक नए हादसे को न्योता दे रहा है। शादी-ब्याह और कोहरे में सबसे ज्यादा जानलेवा बनता है हाईवे
हादसों के आंकड़े बताते है कि NH-719 पर शादी-विवाह के दिनों में हादसों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। इन दिनों हाईवे पर अचानक वाहनों का दबाव बढ़ जाता है, जिससे टक्कर और जानलेवा हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सर्दियों के मौसम में कोहरा हालात को और खतरनाक बना देता है। कम दृश्यता के बीच तेज रफ्तार वाहन हाईवे पर दौड़ते हैं, जिससे चालक सामने से आने वाले वाहनों या सड़क की स्थिति का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। यही वजह है कि कोहरे के दिनों में इस हाईवे पर मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी के सीजन और कोहरे के दौरान यह हाईवे पूरी तरह डेंजर जोन में तब्दील हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी बने हुए हैं। तीन साल से आंदोलन जारी, लेकिन सड़क की हालत जस की तस
NH-719 को सिक्स लेन बनाने की मांग तीन वर्षों से लगातार उठ रही है। इस आंदोलन की शुरुआत जिले के पूर्व सैनिकों ने की थी, जिसके बाद संत समाज और समाजसेवी भी इससे जुड़ते चले गए। अब यह आंदोलन मध्य प्रदेश की सबसे ज्वलंत सड़क समस्याओं में शामिल हो चुका है। संत समाज की ओर से चंबल पुल से ग्वालियर स्थित रानी लक्ष्मी बाई की समाधि स्थल तक पदयात्रा निकाली गई। इसके अलावा भिंड में 10 दिनों तक धरना और अनशन भी किया गया। सिक्स लेन की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की गई, वहीं दिल्ली जाकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक भी मांग पहुंचाई गई। जुलाई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस हाईवे को वर्ष 2028 तक फोर लेन बनाए जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन सात महीने बीतने के बाद भी जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद 29 दिसंबर को संत समाज ने दोबारा आंदोलन करते हुए ‘नो रोड-नो टोल’ की थीम पर दो घंटे तक टोल फ्री कराया। आंदोलन के बाद एक बार फिर डीपीआर तैयार करने और भूमि अधिग्रहण जैसे आश्वासन दिए गए, लेकिन सड़क की सूरत अब तक नहीं बदली। हाईवे पर उजड़े परिवार: कुछ दर्दनाक हादसे 17 दिसंबर 2024: पति-पत्नी और बेटे की मौत
गुजरात के सूरत में ऑटो चलाने वाले भिंड के दीखतनपुरा निवासी अनिल बघेल पत्नी और ढाई साल के बेटे के साथ गांव लौटे थे। 17 दिसंबर की रात NH-719 पर बरोही क्षेत्र में तेज रफ्तार डंपर ने ऑटो को टक्कर मार दी। हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। 18 फरवरी 2025: डंपर ने टक्कर मारी, 7 की मौत
भिंड जिले के जवाहरपुरा गांव के पास नेशनल हाईवे-719 पर सुबह 5 बजे हादसा हुआ था। तेज रफ्तार डंपर ने सड़क किनारे खड़े लोडिंग वाहन को टक्कर मारी और फिर एक बाइक को भी चपेट में ले लिया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 18 लोग घायल हुए थे। सभी लोग जवाहरपुरा में शादी समारोह से अपने गांव भवानीपुरा लौट रहे थे और आपस में रिश्तेदार थे। पूरी खबर पढ़ें 30 सितंबर 2025: एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
फूप कस्बे के पास टेढ़ा की पुलिया पर सौरा गांव निवासी सुनील बघेल अपनी पत्नी पपीता, बेटे छोटे और बेटी अंशु को बाइक पर लेकर नवदुर्गा पूजन के लिए जा रहा था। ट्रक की टक्कर से पूरे परिवार की मौत हो गई। इस हादसे में भिंड के गोताखोर भोला खान की भी जान चली गई। हादसे के दो दिन बाद इसका VIDEO सामने आया। पूरी खबर पढ़ें


