विकास तिवारी को सांसद प्रतिनिधि पद से भी हटाया गया:सांसद रंजीता रंजन के कार्यालय ने जारी की सूचना,लगातार तीसरी बड़ी कार्रवाई

राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन ने विकास तिवारी को अपने सांसद प्रतिनिधि पद से हटा दिया है। विकास तिवारी के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। झीरम घाटी हमले को लेकर पार्टी लाइन से अलग बयान देना उन्हें भारी पड़ गया है। पहले उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटाया गया, इसके बाद पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। अब एक और सख्त कदम उठाते हुए सांसद कार्यालय की ओर से इसकी आधिकारिक सूचना जारी कर दी गई है। विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब विकास तिवारी ने झीरम घाटी नक्सल कांड को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं का नार्को टेस्ट कराने की मांग सार्वजनिक रूप से की। उन्होंने इस संबंध में न्यायिक जांच आयोग को पत्र भी लिखा था। इस पत्र में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल होने के बाद कांग्रेस के भीतर असहजता बढ़ गई। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन के खिलाफ कदम माना। बयान सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सबसे पहले विकास तिवारी को वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटा दिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर उन्हें तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। हालांकि, पार्टी सूत्रों के मुताबिक तिवारी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद प्रभारी महामंत्री के माध्यम से कार्रवाई करते हुए उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। इस पूरे विवाद के दौरान विकास तिवारी कांग्रेस भवन भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने झीरम घाटी हमले में शहीद कांग्रेस नेताओं को श्रद्धांजलि दी थी। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस मामले से जुड़े अहम दस्तावेज हैं और एक लिफाफा कांग्रेस कार्यालय में सौंपा था। उन्होंने एनआईए और झीरम जांच आयोग को पत्र लिखकर नार्को टेस्ट की मांग भी दोहराई थी, जिससे पार्टी के भीतर विवाद और गहरा गया।

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