शंकराचार्य मठ इंदौर में पूर्णिमा महोत्सव:दैहिक, दैविक और भौतिक तापों को नष्ट करने वाले हैं दत्तात्रय- डॉ. गिरीशानंदजी महाराज

दत्तात्रय का मतलब है दैहिक, दैविक और भौतिक तापों को नष्ट करने वाले त्रिगुणातीत, त्रिदेव के अंश, सृष्टि के निर्माता, पालक और संहार के कारक हैं। वास्तव में जब कोई अत्रि जैसा तपस्वी और अनुसूइया जैसी पतिव्रता स्त्री होती है, तो उनके यहां भगवान का अवतार होता है। एरोड्रम क्षेत्र में दिलीप नगर नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने दत्त जयंती और पूर्णिमा पर विशेष प्रवचन में रविवार को यह बात कही। माता अनुसूइया के यहां हुआ दत्तात्रय का प्राकट्य महाराजश्री ने बताया एक बार देवर्षि नारद वैकुंठधाम पहुंचे। लक्ष्मीजी ने कहा- देवर्षि आप बहुत दिनों बाद पधारे हैं। उन्होंने कहा- माता अनुसूइयाजी के आश्रम में ऐसा आनंद आया कि वहां से आने का मन ही नहीं हो रहा था। पूछा क्यों? नारदजी बोले- वे महान प्रतिव्रता हैं। लक्ष्मीजी ने पूछा- क्या मुझसे भी ज्यादा? नारदजी ने कहा- हां। फिर वे पार्वतीजी के पास पहुंचे। पार्वतीजी ने प्रसाद में लड्‌डू दिया। नारदजी बोले- माता जो अनुसूइया के लड्‌डू में स्वाद है, वह इसमें नहीं है। उन्होंने कहा क्यों? नारदजी ने कहा- वे महान प्रतिव्रता हैं। उन्होंने सावित्री से भी ऐसा ही कहा। तीनों देवियों ने अपने-अपने पतियों से अनुसूइया का पतिव्रत भंग करने को कहा। तीनों देवताओं के समझाने पर भी वे नहीं मानीं। तीनों देव अनुसूइयाजी के आश्रम में गए। अनुसूइयाजी से भिक्षा मांगी कि आप निर्वस्त्र होकर भिक्षा दीजिए। निर्वस्त्र का मतलब वासना के त्याग का है। अनुसूइयाजी ने तीनों को बच्चा बना दिया और भिक्षा दे दी। इधर, ये तीन देवियां जिन्होंने अपने पतियों को अनुसूइया का पतिव्रत भंग करने के लिए भेजा था, नहीं लौटने पर परेशान हो गईं और उन्हें खोजने जाने लगीं। रास्ते में नारदजी मिले। नारदजी ने कहा- आपके पति अनुसूइयाजी के आश्रम में हैं। वे डरते-डरते अनुसूइया के आश्रम में पहुंची। अनुसूइयाजी से कहा कि आप हमारे पति वापस दे दो। अनुसुइया ने कहा- वे पालने में हैं, पहचान लो और ले जाओ। इतने में अत्रिजी आ गए। उन्होंने कहा- देवी तुमने यह क्या किया। ये त्रिदेव और तीन देवी हैं। इन्हें इनके पति वास्तविक स्वरूप में वापस करो। अनुसूइयाजी तीनों देवों को वास्तविक स्वरूप में ले आईं। तीनों देव से वचन लिया कि भविष्य में किसी पतिव्रता के पतिव्रत को भंग नहीं करोगे। ब्रह्मा, विष्णु, महेश अनुसूइया के पतिव्रत के प्रताप से प्रसन्न हुए। उन्होंने अनुसूइया द्वारा मांगा गया वचन तो दिया ही, साथ ही आशीर्वाद दिया कि आपने हमें बालक बनाया है, इसलिए हम तीनों के अंश से आपके यहां अवतार लेंगे। इस तरह ब्रह्मा, विष्णु, महेश के अंश से अनुसूइया के यहां दत्तात्रय का प्राकट्य हुआ।

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