कोटा में अब पुराने नामों से पहचान वाले चौराहों के नाम बदले जाएंगे। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) की बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिए गए हैं। इसके साथ ही कई निर्णय बैठक में लिए गए है। बैठक प्राधिकरण अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में कोटा के चौराहों के नाम बदलने को लेकर निर्णय लिया गया है। नगरीय विकास विभाग के नए सर्कुलर के अनुसार विभिन्न चौराहों के नाम परिवर्तन का निर्णय लिया गया जिसके तहत घोड़े वाले बाबा चौराहे का नाम टीलेश्वर चौराहा, विवेकानंद नगर स्थित टोटका चौराहे का नाम भगवान बिरसा मुंडा चौराहा तथा एमबीएस मार्ग स्थित सर्किल का नाम सैन महाराज सर्किल किया जाएगा। कोटा में एरोड्रम से सीएडी जाने के दौरान पहला चौराहा घोडे़ वाला बाबा चौराहा है। पुराने जमाने से ही नाम से चौराहे को बताया जाता था, दरअसल यहां पर एक घोडे़ की मूर्ति बनी हुई है इसलिए इसे घोडा चौराहा कहा जाता था। अब इसका नाम टीलेश्वर चौराहा होगा। इसी सर्किल के पास में टीलेश्वर मंदिर है, ऐसे में इसका यह नाम किया जा रहा है। वहीं टोटका चौराहा का नाम भी स्थानीय लोगों ने दे रखा था, जिसे अब भगवान बिरसा मुंडा चौराहा और एमबीएस रोड पर जो सर्किल है उसे अपने नाम की पहचान मिलेगी। आवास और भूखंड के नहीं लेंगे फोटो
बैठक में निर्णय लिया गया है कि ऑनलाइन नामांतरण प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाते हुए अब आवेदकों से उनके आवास अथवा भूखंड के फोटोग्राफ नहीं लिए जाएंगे। नामांतरण की प्रक्रिया केवल वैध दस्तावेजों के आधार पर पूरी की जाएगी। केडीए की आगामी योजनाओं में लॉटरी आवंटन से पहले मौके पर भूखंडों का डिमार्केशन कराया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रस्तावित भूमि पर किसी प्रकार का कोर्ट स्टे अथवा अतिक्रमण न हो, जिससे आवंटियों को भविष्य में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। विभिन्न योजनाओं में लंबे समय से खाली पड़े भूखंडों से होने वाली दिक्कतों को देखते हुए इनके मालिकों को 15 दिन का नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया। निर्धारित अवधि में साफ-सफाई एवं समतलीकरण नहीं होने पर आवंटन अस्थायी रूप से निरस्त किया जाएगा। भूमि अवाप्ति के लिए बनेगी कमेटी
बैठक में भूमि अवाप्ति के लिए कमेटी गठन की अनुशंसा बोर्ड में की गई। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में पूर्व पंजीकृत आवेदकों को लॉटरी के माध्यम से फ्लैट आवंटन, श्री मथुराधीश जी मंदिर के विकास कामों की पुष्टि भी की गई। इसके अलावा विभिन्न संस्थाओं को सामाजिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक प्रयोजनों के लिए जमीन आवंटन के प्रस्तावों की पुष्टि करते हुए राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजने का निर्णय लिया गया।


