जैसलमेर जिले की परमाणु नगरी पोकरण में प्रशासन द्वारा कब्रिस्तान की चारदीवारी पर चलाए गए बुलडोजर का मामला अब गरमा गया है। मंगलवार को अल्पसंख्यक समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर प्रतापसिंह से मुलाकात की और प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौंपा। समुदाय का कहना है कि प्रशासन ने द्वेष भावना के तहत केवल एक पक्ष को निशाना बनाया है। ‘बाकी निर्माणों को छोड़ सिर्फ दीवार पर चला पीला पंजा’ कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जिस खसरा नंबर पर कब्रिस्तान की चारदीवारी बनी थी, उसी खसरे में राजपूत समाज के 7-8 पक्के मकान, सुथार समाज के घर और पुराना खादी भंडार (शक्ति स्थल) भी स्थित हैं। आरोप है कि प्रशासन ने अन्य निर्माणों को छूना तक मुनासिब नहीं समझा और बिना किसी पूर्व नोटिस या सुनवाई के केवल कब्रिस्तान की दीवार को ढहा दिया। समाज ने इसे ‘टारगेटेड’ कार्रवाई करार देते हुए भारी रोष जताया है। गौ-हत्या कांड की निंदा, दोषियों को सजा की मांग प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में पोकरण में हुए गौ-हत्या प्रकरण पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने इसे ‘शर्मसार करने वाली और निंदनीय’ घटना बताते हुए कहा कि पूरा मुस्लिम समाज इसकी घोर निंदा करता है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। समाज ने स्पष्ट किया कि वे जांच और दोषियों को सजा दिलाने में प्रशासन के साथ खड़े हैं। सुरक्षा के लिए तारबंदी की मांग दीवार गिरने के बाद अब कब्रिस्तान खुला होने के कारण वहां पशुओं का विचरण बढ़ गया है, जिससे कब्रों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा पैदा हो गया है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि: मौलाना मोहम्मद अरशद काश्मी ने बताया- “प्रशासन ने बिना नोटिस दिए द्वेषपूर्ण तरीके से दीवार गिराई है। हम चाहते हैं कि न्याय की प्रक्रिया में समानता हो और कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में तारबंदी के निर्देश दिए जाएं।” इस दौरान पूर्व जिला प्रमुख अब्दुल्ला फकीर, एडवोकेट अब्दुल रहमान, एडवोकेट फिरोज, कारी मोहम्मद अमीन, मौलवी रहमतुल्लाह समेत अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मौजूद रहे।


