बस्तर के अबूझमाड़ में हुए एनकाउंटर में फोर्स ने 25 लाख रुपए के हार्डकोर इनामी नक्सली रामचंद्र का एनकाउंटर किया है। संगठन में आने से पहले ये इंजीनियर रह चुका है। रामचंद्रम पिछले कई सालों से बीमार था। आंखें 70 प्रतिशत खराब हो चुकी थी। संगठन के 4 लोग इसे पकड़कर चलते थे। कुछ साल पहले ही ये ओडिशा से अबूझमाड़ पहुंचा था। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। एनकाउंटर में अब तक कई बड़े कैडर्स के नक्सली भी मारे जा चुके हैं। 3 दिन पहले बस्तर के अबूझमाड़ में जवानों ने 7 माओवादियों को मार गिराया था। इन सभी पर 40 लाख रुपए का इनाम भी घोषित था। इन्हीं में से एक नक्सलियों के SCM (स्टेट कमेटी मेंबर) रामचंद्र भी था। पुलिस ने इनकी फाइल खंगाली तो पता चला कि, यह इंजीनियर था। मुख्यधारा से भटका और इसने हिंसा का रास्ता चुन लिया। छत्तीसगढ़, ओडिशा समेत अन्य पड़ोसी राज्यों में यह सक्रिय रहा है। नक्सल सूत्रों की मानें तो पिछले करीब डेढ़ से 2 साल से यह बस्तर के अबूझमाड़ के जंगल में किसी ठिकाने में था। बीमार था। आंखों की रोशनी कम ही गई थी। इसे नक्सल संगठन के चार लोग लेकर चलते थे। पहले भी फंसा था बस्तर के कई इलाकों में पुलिस और नक्सलियों ये बीच मुठभेड़ हुई है। रामचंद्र पहले भी कई मुठभेड़ों में पुलिस की गोलियों से बचा है। हालांकि, 3 दिन पहले दक्षिण अबूझमाड़ में हुई इस मुठभेड़ में यह फोर्स की गोलियों से मारा गया। CG में करता था आना-जाना नक्सली लीडर रामचंद्र ओडिशा की कमेटी में रहकर छत्तीसगढ़ के लिए भी रणनीतियां बनाता था। ये भी बेहद खूंखार नक्सली था। CG पुलिस ने इसपर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। यहां ये लगातार आना-जाना करता रहता था। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा की पुलिस कई दिनों से इसकी तलाश कर रही थी। आखिरकार छत्तीसगढ़ पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। आंध्र प्रदेश का था रहने वाला पुलिस की मानें तो यह आंध्रप्रदेश के जिला गुंटूर के पोचमपल्ली का रहने वाला था। इसका असली नाम प्रुदवी मोहन राव है। इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था। लेकिन फिर नक्सल संगठन से जुड़ गया। इसके बाद प्रुदवी मोहन राव उर्फ रामचंद्र उर्फ कार्तिक उर्फ दसरू उर्फ दसरन्ना उर्फ नरेश उर्फ लखमू उर्फ जीवन इन नामों से जाना जाता था। सेफ जोन सोचकर भेजे थे अबूझमाड़, यहां घुसकर पुलिस ने मारा छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश में इसकी सक्रियता थी। आंध्रप्रदेश नल्लामला फॉरेस्ट एरिया में पीपुल्स वार ग्रुप के लिए नक्सल गतिविधियों में शामिल था। लेकिन बाद में नक्सलियों ने इसे ओडिशा भेज दिया। यहां नक्सलियों की ओडिशा स्टेट कमेटी का मेंबर बना दिया गया। इस जगह भी वह सक्रिय होकर काम कर रहा था। ओडिशा में सबसे ज्यादा वक्त बिताया था। दो सालों से बीमारी के चलते इसे अबूझमाड़ में शिफ्ट कर दिया गया था। नक्सली इस इलाके को सेफ जोन मानते थे। लेकिन, पुलिस ने गढ़ में घुसकर मार डाला।


