धुर्वा थाना क्षेत्र के मौसीबाड़ी स्थित मल्लार कोचा से अपहृत भाई-बहन की 12 दिनों बाद भी पुलिस पता नहीं लगा सकी है। इससे जगन्नाथपुर समेत पूरी राजधानी के लोग सकते में हैं। आखिर दोनों बच्चों को अपहर्ता कहां ले गए और किस रास्ते से ले गए। इसे लेकर पुलिस के प्रति लोगों में गुस्सा भी है। हालांकि पुलिस ने कई तरीकों से बच्चों का पता लगाने का प्रयास किया। कॉल डिटेल खंगाले, बगल में लगने वाले शालीमार बाजार के एक-एक दुकानदार से बात की, घटना के बाद वाले बाजार में कौन-कौन दुकानदार नहीं पहुंचे, इसकी भी पड़ताल की, उनसे पूछताछ भी की, लेकिन अबतक दोनों बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड पर जाकर पुलिस से बात की और अब तक की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी जुटाई… अबतक पुलिस ने बच्चों को ढूंढने के लिए ये तरीके अपनाए… इनाम की राशि 51 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रु. कर दी 4 जनवरी को बच्चों की जानकारी देने वाले को रांची पुलिस ने 51 हजार रु. इनाम देने की घोषणा की। 7 दिनों बाद इनाम की राशि बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई। 300 से ज्यादा जगहों पर अपहृत बच्चों का पोस्टर लगाकर सुराग ढूंढा। 20 राज्यों के 439 जिलों में एनजीओ कार्यकर्ताओं से मदद मांगी। नतीजा : परिणाम शून्य है, दोनों बच्चों का अबतक कोई सुराग पुलिस को नहीं मिला है। शालीमार बाजार के 640 दुकानदारों से की पूछताछ धुर्वा इलाके में घटना वाले दिन से लेकर अबतक आने-जाने वाले 39 हजार से ज्यादा संदिग्ध वाहनों की लिस्टिंग कर नंबर के आधार पर जांच की गई। शालीमार बाजार में 640 दुकान संचालकों से भी पूछताछ की गई है। हालांकि इससे भी बच्चों के बारे में कोई जानकारी पुलिस को नहीं मिल पाई। नतीजा : दुकानदारों के सत्यापन के दौरान भी बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। एक दिन का मोबाइल कॉल डंप कर सत्यापन किया अपहृत नाबालिग भाई-बहन की तलाश में पुलिस की टीम टेक्निकल सेल की मदद से घटना के दिन टावर लोकेशन के आधार पर कुछ घंटे का मोबाइल डंप उठाया। मौसीबाड़ी इलाके में कॉल डंप के आधार पर 1.32 लाख मोबाइल नंबर धारकों का सत्यापन किया गया। नतीजा : कोई संदिग्ध कॉल नहीं मिला, जो इलाके में घटना के दिन या उससे पहले ज्यादा सक्रिय रहा।


