सूर्य के उत्तरायण होने और रबी की फसल कटाई के उपलक्ष्य में अग्निदेव और सूर्यदेव की पूजा कर आभार व्यक्त करने के लिए पंजाबी समुदाय ने मंगलवार को लोहड़ी मनाई। रांची और आसपास के इलाकों में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर सामूहिक लोहड़ी मनाई गई, जबकि समुदाय के लोगों ने अपने घरों में भी लोहड़ी की पवित्र अग्नि प्रज्वलित की। पंजाबी हिंदू बिरादरी ने ओवरब्रिज के निकट पंजाबी भवन में सांझी लोहड़ी का आयोजन किया, जबकि बहावलपुरी पंजाबी समाज ने कृष्णा नगर कॉलोनी, सिख समाज ने गुरुनानक स्कूल और रांची नागरिक समिति ने अपर बाजार बड़ा लाल स्ट्रीट चौक पर सांझी लोहड़ी का आयोजन किया। पवित्र अग्नि जलाकर उसकी परिक्रमा करते हुए अगरबत्ती और धूप दीप जलाकर अर्घ्य के रूप में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, मकई के फुल्ले, घी, तिलकूट, चिवड़ा, तिलपट्टी, गजक प्रज्वलित अग्नि में डाली। अग्नि परिक्रमा करते हुए परिवार के लिए सुख-समृिद्ध और समाज में शांति के लिए पूजा-अर्चना की। इसके अलावा दर्जनों जगहों पर सांझी लोहड़ी मनाई गई। आयोजन में शामिल पुरुषों और महिलाओं के साथ युवतियों ने पंजाबी लोकगीतों के साथ भांगड़ा और गिद्दा पेश किया। सांझी लोहड़ी के कार्यक्रमों में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, महुआ मांझी, सांसद आदित्य साहू सांसद प्रदीप वर्मा विधायक सीपी सिंह और नवीन जायसवाल के अलावा पूर्व उप महापौर संजीव विजयवर्गीय, चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा शामिल हुए और पंजाबी समुदाय के लोगों को बधाई दी। जिन घरों में बहू की पहली लोहड़ी और पहला बच्चा हुआ वहां जमकर उत्सव मनाया गया। सिंधी समाज के लोगों ने मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर लोहड़ी की तरह उत्साह के साथ लाल लोई पर्व मनाया। सिंधियों ने घरों और मंदिर परिसरों में शाम के समय अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा की। इस दौरान भगवान झूलेलाल को समर्पित भजन और लोकगीत गाए। रांची नागरिक समिति द्वारा बडालाल स्ट्रीट अपर बाजार के चौराहे पर लोहड़ी मनाई गई। आयोजन में शामिल लोगों ने स्व.अशोक नागपाल को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा लोहड़ी खुशियों का त्योहार है। अशोक नागपाल ने जो सिलसिला जारी रखा आज उनके पुत्र उसी प्रकार से सभी समाज के लोगों को एक साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहे हैं। कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेन्द्र सिंह ने कहा कि पंजाब और आसपास के राज्यों जम्मू, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोहड़ी के 15 दिन पहले ही लोहड़ी मांगने की प्रथा शुरू हो जाती थी। मोहल्ले के दरवाजे पर पहुंचकर बच्चों और युवाओं की टोलियां लोहड़ी के गीत सुंदर मुंदरिए तेरा कौन विचारा, हो दुला भट्टी वाला, हो दुलले ने धी व्याई, हो सेर शक्कर पाई, हो कुड़ी दा लाल पटाका, हो कुड़ी दा शालू पाटा, हो तेरा जीवे चाचा, सानू दे लोहड़ी जीवे तेरी जोड़ी…गाकर घरों से लोहड़ी मांगते। टोली को नकद पैसों के अलावा लकड़ियों के साथ गोएठे देते और टोली के बच्चों को कुछ मीठा भी खाने को देते, लेकिन यह परंपरा कम हो गई है।


