जयपुर | मकर संक्रांति के लिए शहर में करीब 40 लाख चरखियां और करीब 4 करोड़ से ज्यादा पतंगें बिकी हैं। इस बार पतंगबाजों में डिजाइनर चरखियां आकर्षण का केंद्र रही। जौहरी बाजार कुंदीगर भैरों का रास्ता स्थित खैरादियों का मोहल्ला में लोग ऊं, स्वास्तिक जैसे निशान के साथ-साथ बच्चों के नाम भी शीशम की लकड़ी से बनी चरखियों पर गुदवाते दिखे। ये वजन में हल्की होती है लेकिन आकर्षण का केंद्र विशेष जैन की 28 किलो की चरखी हैं। ताहिर भाई का परिवार 110 साल से चरखियां बना रहा है। दिलीप पतंग वाले फरमान भाई ने बताया कि जयपुर की चरखियों की गुजरात, यूपी व दिल्ली में ज्यादा डिमांड है। 6 फीट लंबी, दो लोग चाहिए पकड़ने के लिए 1100 मांझे की गट्टे भरे जा सकते हैं, एक गट्टे यानी एक रील की लंबाई करीब 900 मीटर होती है। उस हिसाब से 9 लाख 90 हजार मीटर डोर भरी जा सकती है यानी पतंग 990 किलोमीटर की दूरी तय कर नेपाल तक पहुंचाई जा सकती है। 28 किलो की सबसे बड़ी चरखी { साइज साढ़े 6 फीट { वजन 28 किलो, दो व्यक्ति उठा सकते हैं। { बीच में पीतल की रॉड है। { पहिए के दोनों तरफ पकड़ने के लिए 21-21 इंच बाहर निकलती डंडियां। { पहिए की गोलाई 15 इंच, मोटाई 32 एमएम, वजन 8-8 किलो { चरखी की ताड़ी 4 किलो { टोटल ताड़ी 51 { कीमत – 55 हजार रुपए


