पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा हॉस्पिटल में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब ने काम शुरू कर दिया है। पिछले सप्ताह चार महिलाओं के घुटनों में इंजेक्शन लगाया गया था, जिनमें से तीन महिलाएं मंगलवार को फॉलोअप के लिए पहुंचीं। ये महिलाएं घुटनों के दर्द से काफी राहत महसूस कर रही हैं। पीबीएम के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं लैब प्रभारी डॉ. अजय कूपर ने बताया कि तीनों महिलाएं पहले से ज्यादा राहत महसूस कर रही हैं। उन्हें चलने में अब कोई परेशानी नहीं है। इन्हें अब एक महीने बाद वापस बुलाया गया है। जरूरत पड़ी तो दूसरी डोज दी जाएगी। उन्होंने बताया कि लैब में हड्डी एवं मस्क्यूलोस्केलेटल बीमारियों के मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। विभाग की ओपीडी में रोज करीब 400 मरीजों में से 30 घुटनों की तकलीफ वाले होते हैं, जिनके घुटने घिस चुके हैं। उन्हें चलने और उठने-बैठने में काफी तकलीफ होती है। ऐसे मरीजों के लिए बिना चीर-फाड़ के यह उपचार काफी कारगर है। मंगलवार को एक मरीज की कोहनी में इंजेक्शन लगाया गया है। एक सप्ताह बाद उसकी दोबारा जांच की जाएगी। “ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब खुलने के एक ही सप्ताह में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। अन्य जिलों से भी मरीज संपर्क करने लगे हैं। खास बात यह है कि मधुमेह पीड़ित मरीजों का भी इससे इलाज संभव है।” — डॉ. अजय कपूर, वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ, पीबीएम भास्कर नॉलेज – प्राकृतिक रूप से हीलिंग एवं टिशू रिपेयर ओबीआरसी एक आधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रीजेनरेटिव उपचार पद्धति है, जिसके माध्यम से शरीर में प्राकृतिक रूप से हीलिंग एवं टिशू रिपेयर को प्रोत्साहित किया जाता है। खास बात यह है कि यह उपचार मरीज के स्वयं के रक्त एवं बोन मैरो से प्राप्त ब्लड कंपोनेंट्स को संकेंद्रित कर, मरीज के खून से ही उपचार टीका तैयार किया जाता है। ओबीआरसी उपचार एक मिनिमम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें बिना किसी ऑपरेशन, चीर-फाड़ अथवा बाहरी रसायनों (जैसे स्टेरॉइड) के उपचार संभव है। यह एक ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें रोगी लगभग एक घंटे में उपचार लेकर घर जा सकता है।


