गिरवाई से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक दूसरे चरण में निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के लिए बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर शिफ्टिंग में ठेकेदार द्वारा मनमानी की जा रही है। यहां ठेकेदार द्वारा तय अनुबंध शर्तों के अनुसार काम न करते हुए खुद के हिसाब से काम किया जा रहा है, जिसमें सबसे बड़ा नुकसान शिफ्टिंग के दौरान उपयोग हो रहे सामान की क्वालिटी को लेकर होने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में शहर में बिजली संकट बढ़ता जाएगा। जिसे लेकर विद्युत वितरण कंपनी की एसटीसी विंग ने काम करा रहे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ईएंडएम विंग को पत्र भेजकर कहा है कि ठेकेदार से नियम एवं शर्तों का पालन कराया जाए। वहीं ईएंडएम विभाग के अधिकारी मॉनिटरिंग व दूसरी जिम्मेदारियों के लिए बिजली कंपनी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर गलत काम करने वाले ठेकेदार को संरक्षण देने में जुटे हैं। कुलमिलाकर अफसरों और ठेकेदार की मिलीभगत का खामियाजा जनता भुगतेगी। ठेकेदार की मनमानी हर नियम और शर्त पर भारी क्या करना है: इस काम के लिए बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर का जो भी सामान लिया जाए। वह बिजली कंपनी से अधिकृत वेंडर्स से ही लेना होगा। क्या हो रहा: अपनी मर्जी से ठेकेदार द्वारा सामान लिया जा रहा है। क्या करना है: सामग्री को उपयोग करने से पहले उसकी टेस्टिंग बिजली कंपनी की एनएबीएल लैब में करानी होगी। क्या हो रहा: ठेकेदार ने सामान को लगाना शुरू कर दिया। लेकिन उसकी टेस्टिंग नहीं कराई। क्या करना है: संयुक्त दल द्वारा तय किए गए प्लान अनुसार वर्कमैनशिप का कार्य कराना चाहिए। क्या हो रहा: प्लान के तहत या सही टूल्स के साथ काम नहीं हो रहा। बल्कि ठेकेदार अपनी सुविधा के अनुसार ये काम कर रहा है। जिसमें जान-माल का जोखिम लगातार बना हुआ है। क्या करना है: कहीं भी कोई काम करने से 7 दिन पहले बिजली कंपनी को सूचना ठेकेदार द्वारा दी जानी चाहिए। क्या हो रहा: काम शुरू करने से पहले कोई सूचना नहीं दी जा रही। जिस कारण बिजली सप्लाई शेड्यूल बिगड़ने के अलावा दूसरी परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है। पहले दिलाया पेटी पर काम, अब छिपा रहे गड़बडिय़ां करीब 8 किलोमीटर लंबे इस रूट में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर शिफ्टिंग के लिए 19 करोड़ रुपए से अधिक का ठेका मैसर्स मनोज वर्मा फर्म को दिया गया। लेकिन काम ये कंपनी नहीं कर रही, बल्कि साकेत सेंगर द्वारा अपनी फर्म पर पेटी कांट्रेक्ट लेकर किया जा रहा है। बताया गया है कि सेंगर बिजली कंपनी में पदस्थ अफसरों का करीबी है, इसलिए पेटी कांट्रेक्ट पर ये काम दिलवा दिया गया है। अब बिजली कंपनी ने जब मै. मनोज वर्मा के नाम पर नोटिस जारी किया है तो इस फर्म ने जिम्मेदारी पेटी कांट्रेक्टर पर डालते हुए पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। इतने इंफ्रास्ट्रक्चर की होगी शिफ्टिंग जिम्मेदारों के अपने-अपने बहाने हमें पता चला कि ठेकेदार नियमों का पालन नहीं कर रहा है। जिसे रोकने ईएंडएम के कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखा है। नोडल एजेंसी वही हैं।
– श्रीनिवास यादव, डीजीएम/ एसटीसी विंग बिजली कंपनी सुपरविजन की जिम्मेदारी बिजली कंपनी की है और हमारे विभाग के एसडीओ हेमंत शर्मा इसे देख रहे हैं। जो करना है इन सभी को करना है।
– सुनील जाटव, कार्यपालन यंत्री/ ईएंडएम पीडब्ल्यूडी इंफ्रास्ट्रक्चर शिफ्टिंग का हमने ठेका जरूर लिया है, लेकिन वहां काम साकेत सेंगर कर रहा है और किसी भी बात के लिए वही जिम्मेदार है।
– मनोज वर्मा, ठेकेदार/ मैसर्स मनोज वर्मा


