मकर संक्रांति के अवसर पर भिलाई-दुर्ग अंचल में पारंपरिक पर्वों की रौनक देखने को मिली। 13 जनवरी की रात शहर में पोंगल और लोहड़ी का पर्व पूरे उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक समरसता के साथ मनाया गया। वहीं 14 जनवरी बुधवार को मकर संक्रांति के अवसर पर भिलाई के जयंती स्टेडियम के पास स्थित हैलीपेड ग्राउंड में पुलिस प्रशासन द्वारा जिले के सबसे बड़े पतंग महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसे लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह है। पोंगल पर्व दक्षिण भारत की संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व मुख्य रूप से नई फसल के स्वागत और सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। भिलाई के खुर्सीपार क्षेत्र में छत्तीसगढ़ अग्निकुल क्षत्रिय समाजम खुर्सीपार मंडल द्वारा बोगी एवं मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार बोगी जलाई गई, जिसमें पुराने वस्त्र और अनुपयोगी वस्तुओं को अग्नि में समर्पित कर नई शुरुआत का संदेश दिया गया। पोंगल पर्व आपसी भाईचारे, पारिवारिक एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव जागृत करता है। जगह-जगह सिख समाज ने मनाया लोहड़ी पर्व
वहीं सिख समाज का प्रमुख पर्व लोहड़ी भी दुर्ग जिले के प्रमुख गुरुद्वारों में श्रद्धा के साथ मनाया गया। लोहड़ी पर्व विशेष रूप से नई फसल, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। गुरुद्वारों के बाहर विशेष पूजा-अर्चना की गई और पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाइयां दीं और सुख-समृद्धि की कामना की। लोहड़ी का पर्व सामूहिकता, सेवा और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है। आज पुलिस का सबसे बड़ा पतंग महोत्सव
इसी क्रम में मकर संक्रांति के दिन भिलाई में पतंगबाजी का उत्सव खास आकर्षण रहेगा। जयंती स्टेडियम के पास हैलीपेड ग्राउंड में आयोजित होने वाले पतंग महोत्सव में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि मकर संक्रांति के महत्व सूर्य के उत्तरायण होने, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत को भी दर्शाता है। पुलिस इस दौरान लोगों को यातायात नियमों का पालन करने और जागरूकता फैलाने की भी सलाह देगी।


