झुंझुनूं के आसमान में ‘पतंग युद्ध’:दो दिन के कोहरे के बाद खिली धूप ने बढ़ाया रोमांच, कोहरा छंटा, अब ‘मांझे’ की धार और ‘हवा’ की रफ्तार

झुंझुनूं फिजाओं में आज सुबह से ही एक अलग ही गूंज है। पतंगबाजों के लिए आज का दिन खुशी लेकर आया है। पिछले 48 घंटों से जिस घने कोहरे ने शहर को अपनी आगोश में ले रखा था, आज मकर संक्रांति के मौके पर वह पूरी तरह छंट चुका है। आसमान बिल्कुल साफ है और हल्की पछुआ हवा ने पतंगबाजों के चेहरे खिला दिए हैं। अलसुबह से छतों पर ‘कब्जा’, डीजे की धमक पर थिरक रहा शहर अलसुबह से झुंझुनूं के मोहल्लों—मोडा पहाड़ से लेकर चूरू रोड और कलेक्ट्रेट इलाके तक—छतों पर हलचल शुरू हो गई। देखते ही देखते शहर की हर छत एक ‘स्टेडियम’ में तब्दील हो गई है। कहीं गानों की गूंज है, तो कहीं ‘वो काटा’ का शोर। हर घर की छत पर परिवार के सदस्यों का भारी जमावड़ा है। छतों पर चरखी और पतंग संभाल रहीं महिलाएं पतंगबाजी का रोमांच केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है। झुंझुनूं की छतों पर महिलाएं भी पूरे जोश के साथ नजर आ रही हैं। कोई पतंग की कन्नी बांधने में माहिर दिख रही है तो कोई चरखी थामकर अपने साथी का हौसला बढ़ा रही है। गृहणियों का कहना है कि रसोई का काम जल्दी निपटाकर अब पूरा दिन छतों पर पेंच लड़ाने का है। दान-पुण्य की बयार: धर्म और मनोरंजन का संगम शहर में एक तरफ आसमान में पतंगों का तांता लगा है, वहीं दूसरी तरफ मंदिरों और गौशालाओं में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हैं। सुबह 5 बजे से ही लोगों ने गायों को गुड़ और लापसी खिलाकर पुण्य लाभ कमाना शुरू कर दिया। तिल के लड्डू और गरमा-गरम पकौड़ों का दौर हर छत पर चल रहा है। पतंगबाजी के लिए बिल्कुल अनुकूल (10-12 किमी/घंटा हवा है। तिरंगा पतंग और कार्टून वाली पतंगें बच्चों की पहली पसंद बनी हुई हैं।

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