हिमाचल प्रदेश में UP-बिहार के IAS-IPS को लेकर दिए गए बयान पर PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह घिरते जा रहे हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बाद अब पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी विक्रमादित्य सिंह के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। कैबिनेट के भीतर ही खुलकर हो रही असहमति ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। शिमला में बुधवार को मीडिया से बातचीत में पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने साफ कहा कि अधिकारियों पर इस तरह के आरोप लगाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के पिलर होते हैं और उन पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाने से उनका मनोबल गिरता है। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यह बहस नहीं होनी चाहिए कि अधिकारी किस राज्य से हैं, क्योंकि हिमाचल के IAS अधिकारी भी देश के दूसरे राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मंत्री काम नहीं करवा पा रहा है, तो यह उसकी कार्यशैली की कमी हो सकती है। इसमें फंड की उपलब्धता या उसके सही आवंटन का भी मुद्दा हो सकता है, लेकिन हर अधिकारियों के सिर पर जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी गलती दूसरों पर डालने से सिस्टम मजबूत नहीं होता। मंत्री नेगी भी विक्रमादित्य के बयान पर असहमति जता चुके इससे पहले, बीते कल राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी भी विक्रमादित्य सिंह के बयान से असहमति जता चुके हैं। नेगी ने कहा कि बाहर के राज्यों से आए कई अधिकारी हिमाचल में अच्छा काम कर रहे हैं। गुण-दोष हर जगह होते हैं। उन्होंने कहा कि जनरल स्टेटमेंट देने के बजाय यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर समस्या किस अधिकारी से है। ऐसे बयानों से वे अधिकारी भी हतोत्साहित होते हैं, जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं। कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद मंत्री के बयान से चढ़ रहा सियासी पारा PWD मंत्री के पोस्ट और उसके बाद कैबिनेट मंत्रियों की प्रतिक्रिया से सियासी पारा चढ़ गया है। प्रशासनिक दृष्टि से भी यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि IAS और IPS अधिकारी केंद्र और राज्यों के बीच सेतु होते हैं। ऐसे में गैर-हिमाचली अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणियां अब सरकार के भीतर ही नई बहस का कारण बन गई हैं।


