डूंगरपुर में शहर के बीच जिला अस्पताल के सामने 7 साल पहले बने शॉपिंग मॉल को सस्ते दामों पर बेचने का मामला सामने आया है। 14 करोड़ 65 लाख रुपए के बेशकीमती इस शॉपिंग मॉल को 5 करोड़ 19 लाख के नुकसान पर बेचने की शिकायत की गई है।
नगर परिषद के निर्दलीय पार्षद ने इसकी शिकायत स्वायत्त शासन मंत्री और एसीबी में की है। वही नगर परिषद इसे नियमों के अनुसार नीलामी का दावा कर रहा है। 3 मंजिला मॉल में 33 दुकानें बनाई गई
नगर परिषद के निर्दलीय पार्षद नितिन प्रकाश ने शिकायत में बताया कि 7 साल पहले नगर परिषद ने लोगों को शॉपिंग मॉल की सुविधा के लिए वर्ष 2018-19 में मॉल का निर्माण करवाया था। जिला अस्पताल के ठीक सामने बेशकीमती जमीन पर 3 मंजिला मॉल तैयार किया गया। इसमें कुल 33 दुकानें बनाई गई। जबकि रूफ टॉप रेस्टोरेंट की भी योजना थी। जुलाई 2025 में मॉल की नीलामी हुई
बनने के बाद ये शॉपिंग मॉल कई सालों तक खाली पड़ा रहा। इसके बाद मॉल में बनी दुकानों को नीलामी के जरिए बेचकर 14 करोड़ 65 लाख रुपए की आय की योजना बनाई। जुलाई 2025 में नगर परिषद ने मॉल की दुकानों को अलग अलग बेचने की बजाय एकमुश्त पूरे मॉल को बेचने की नीलामी निकाली। ताकि छोटे खरीदार नहीं आ सके और केवल एक व्यक्ति को ही इसका फायदा पहुंचाया जा सके। नगर परिषद पर लगाए आरोप
पार्षद ने ये भी आरोप लगाए कि नीलामी में केवल 2 फर्मों ने ही भाग लिया। लेकिन हकीकत में ये 2 नहीं एक ही फार्म थी। जिस वजह से 9 करोड़ 46 लाख 55 हजार 750 रुपए में मॉल को बेच दिया। इससे नगरपरिषद को 5 करोड़ 19 लाख रुपए का सीधा नुकसान हुआ है। 12 करोड़ से ज्यादा है जमीन की कीमत
पार्षद ने ये भी बताया कि ये मॉल 12 हजार 250 वर्गफीट पर बनाया गया है। ये ज़मीन की बाजार कीमत ही 10 हजार प्रति वर्ग फीट है। इस हिसाब से मॉल के जमीन की कीमत ही 12 करोड़ 25 लाख रुपए से ज्यादा है। वही इसके निर्माण की लागत अलग से है। लेकिन पूरे मॉल की बड़ी नीलामी निकालने से इसमें छोटे व्यापारी भाग नहीं ले सके और एक फर्म को ही फायदा पहुंचाया गया है।
पार्षद ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। वही एसीबी में भी शिकायत करते हुए नीलामी से हुए राजस्व नुकसान की भी जांच करवाने की मांग की है। जुलाई में नीलामी हुई, अब तक 15 पर्सेंट राशि ही जमा करवाई, अब नोटिस
नगर परिषद आयुक्त प्रकाश डूडी ने बताया कि जुलाई 2025 में मॉल की नीलामी की गई थी। निलेश पुत्र रतनलाल गांधी ने 9.46 करोड़ की बोली लगाई थी। इसमें से 15 पर्सेंट राशि फर्म में जमा करवा दी थी। 120 दिनों में 35 पर्सेंट राशि ओर जमा करवानी थी। लेकिन ये राशि अब तक जमा नहीं करवाई गई है। इस पर नियमानुसार 9 पर्सेंट का ब्याज शुरू हो गया है।
13 जनवरी को बोलीदाता को नोटिस जारी कर 180 दिन में राशि जमा करवाने के लिए कहा गया हैं। इसके बाद 90 दिन का समय और दिया जाएगा। 3 नोटिस देकर जमा 15 पर्सेंट की राशि को जब्त कर ली जाएगी और नीलामी को निरस्त की कार्रवाई की जाएगी।


