छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक नया पर्यटन स्थल विकसित हो रहा है, जिसे स्थानीय लोग ‘मिनी गोवा’ कहने लगे हैं। यह क्षेत्र कभी नक्सल प्रभावित था, लेकिन अब यहां के घने जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। नक्सलवाद के साए से बाहर निकलकर, कोंडागांव के वन क्षेत्र अब शांति और विकास की नई पहचान बन रहे हैं। भोर में जब सूर्य की किरणें जंगलों के बीच से निकलती हैं, तो यह दृश्य किसी समुद्री तट का एहसास कराता है, जिसके कारण इसे ‘मिनी गोवा’ नाम दिया गया है। दशकों तक कोंडागांव जिले के परोदा और मर्दापाल परिक्षेत्र के जंगल नक्सल गतिविधियों के कारण आम लोगों से दूर रहे थे। इन जंगलों के बीच बहती भंवरडीह नदी, प्राकृतिक चट्टानें, पहाड़ियों की हरियाली और शांति अब पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। यह वही इलाका है जहां पहले नक्सलियों की मौजूदगी के कारण प्रशासनिक गतिविधियां भी सीमित थीं। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ईको-टूरिज्म हब के रूप में क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी इस पूरे क्षेत्र को ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए 10 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने इस विकास में रुचि दिखाई है। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। वे गाइड, होम-स्टे संचालक, सुरक्षाकर्मी, परिवहन सेवा प्रदाता और हस्तशिल्प विक्रेता के रूप में काम कर सकेंगे। इससे नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधरेगा। मर्दापाल रेंज के जंगल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दक्षिण वन मंडल कोंडागांव के वन मंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह ने बताया कि मर्दापाल रेंज के जंगल बेहद खूबसूरत हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रारंभिक तौर पर व्यू पॉइंट, बंबू राफ्टिंग, जंगल हट और सिट-आउट एरिया का निर्माण किया जा रहा है। 40 परगनाओं की देवगुड़ियों को एक स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।’ सिंह ने आगे कहा, ‘हमारा उद्देश्य इस पूरे क्षेत्र को सुरक्षित, सुंदर और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। यह प्राकृतिक सौंदर्य सदियों तक लोगों की नजरों से दूर रहा था।’


