डीडवाना और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर लोगों ने दान-पुण्य किया और पशुओं को चारा व गुड़ लापसी खिलाई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व भगवान भास्कर के दक्षिणायन से उत्तरायण होने के पवित्र दिन मनाया जाता है। पुराणों में सूर्य के उत्तरायण काल को देवताओं का दिन माना गया है। इस दिन गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। ‘तेरुण्डा’ की परंपरा निभाई
पर्व के दौरान गायों और पक्षियों के लिए भी दान-पुण्य किया गया। सुबह से दोपहर बाद तक कड़ाके की ठंड रही, इसके बावजूद छतों पर पतंगबाजों का उत्साह देखने को मिला।
महिलाओं ने ‘तेरुण्डा’ की परंपरा का निर्वहन किया। इस परंपरा के तहत संक्रांति के अवसर पर 13 वस्तुएं अन्य महिलाओं को भेंट की जाती हैं। दान-पुण्य की मान्यता के चलते लोगों ने जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री और वस्त्र भी भेंट किए।


