टोंक में ऐतिहासिक दड़ा खेल की शुरुआत हो गई है। यह खेल 80 किलो की गेंद के साथ खेला जाता है। जिले के आवां कस्बे में बुधवार दोपहर पूर्व रियासत से जुड़े सदस्यों ने दड़ा गेंद को गढ़ के चौक में लेकर आए और ठोकर मारकर शुरुआत की। खेल खेलने के लिए हजारों लोग आवां के चौक में जुटे हैं। महिलाएं, बच्चे, बूढ़े और अन्य लोग छतों से हूटिंग कर रहे हैं। पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी और आवां सरपंच दिव्यांश एम भारद्वाज समेत कई लोग शामिल हैं। आवां के गढ़ चौक में स्थित गोपाल मंदिर के सामने और आसपास करीब 5 हजार खिलाड़ी गेम शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। दोपहर 1.30 बजे के करीब जैसे ही गेम की शुरुआत हुई और ग्रामीण खेल में कूद पड़े। छत से पूर्व मंत्री देख रहे दड़ा.. गेंद की दिशा को लेकर भी हैं मान्यताएं टोंक के आवां में दड़ा खेल सदियों से खेला जा रहा है। 80 किलो की गेंद को खेल में शामिल हजारों ग्रामीण पैर से ठोकर मारते हुए आगे बढ़ाते हैं। मान्यता है कि गेंद लुढ़कते हुए अगर कस्बे के अखनिया दरवाजे की ओर चली जाती है तो प्रदेश में अकाल पड़ने की संभावना होती है। अगर गेंद दूनी दरवाजे की तरफ जाती है तो अच्छी बारिश और सुकाल की उम्मीद होती है। साथ ही ऐसी मान्यता भी है कि अगर गेंद यानी दड़ा दोनों दरवाजों की तरफ न बढ़कर खेल खत्म होने तक चौक में ही रह जाती है तो इसे न अकाल माना जाएगा न सुकाल। पूरा वर्ष सामान्य रहने की उम्मीद की जाती है। फिलहाल यह खेल दोपहर 3 बजे तक खेला जाएगा।


