इंदौर में आबकारी अधिकारी को जालसाजी में फंसाकर ब्लैकमेलिंग करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी साबिर अली की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी ने खुद को गंभीर रूप से बीमार बताते हुए जमानत के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कोर्ट ने उसके पुराने रिकॉर्ड और आवेदन को झूठा मानते हुए जमानत नहीं दी। यह मामला 2021 में अलीराजपुर में पदस्थ तत्कालीन आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही से जुड़ा है। आरोप है कि शराब माफिया और उनसे जुड़े लोगों ने अधिकारी को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की थी। इस मामले में मुख्य आरोपी फरहत नाजनीन को रायपुर की यश विहार कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया था। फरहत नाजनीन का भाई इमरान अभी न्यायिक हिरासत में है, जबकि उनके पिता साबिर अली को हाल ही में गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर 5000 का इनाम था, पहले भी जमानत के लिए अर्जी की साबिर अली ने 4 दिसंबर 2024 को कोर्ट में समर्पण किया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल में रहते हुए उन्होंने हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। कोर्ट ने पहले भी कई बार उनकी जमानत खारिज की थी और उनके खिलाफ 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। शनिवार को साबिर ने एक और जमानत याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने कहा कि वह सीनियर सिटीजन हैं और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विनय रंगशाही और उनके पिता अशोक रंगशाही ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर झूठी शिकायत की है। कोर्ट ने आवेदन को झूठा माना, कहा- आरोपी को जेल में रखे अपर लोक अभियोजक लीलाधर पाटीदार ने कोर्ट में तर्क दिया कि साबिर अली ने चार सालों तक जांच में किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया। न तो उन्होंने पुलिस की मदद की और न ही स्वयं पेश हुए। जब कोर्ट ने सख्ती करते हुए इनाम घोषित किया, तब जाकर उन्होंने समर्पण किया। अभियोजन ने यह भी कहा कि साबिर को कोई गंभीर बीमारी नहीं है और जेल में उचित इलाज हो रहा है। कोर्ट ने अभियोजन के तर्कों से सहमति जताई और साबिर अली के आवेदन को झूठा मानते हुए जमानत खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी को जेल में ही रखा जाए और वहीं उसका उचित इलाज किया जाए।


