सीहोर में फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के आधार पर एक सरकारी अधिकारी के पदस्थ होने को का मामला सामने आया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के प्रभारी उपसंचालक महेश यादव के दिव्यांगता सर्टिफिकेट पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि वे लंबे समय से इसी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर पद पर आसीन हैं। आयुक्त, सामाजिक न्याय संचालनालय, भोपाल ने सीहोर कलेक्टर को पत्र लिखकर महेश यादव को पद से हटाने और उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया है। दिव्यांगता की जांच के दिए थे निर्देश
महेश यादव सीहोर में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग में लंबे समय से प्रभारी उपसंचालक के पद पर कार्यरत हैं। उनके दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर शिकायतें मिली थीं, जिनमें कहा गया था कि कम दिव्यांगता होने के बावजूद उन्हें अधिक प्रतिशत का सर्टिफिकेट दिया गया है। इन शिकायतों के बाद संचालनालय आयुक्त ने यादव को एम्स संस्थान में अपनी दिव्यांगता की जांच कराने का निर्देश दिया था। हालांकि, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद यादव ने एम्स में जांच नहीं कराई। 2025 में सीहोर हुआ था तबादला
उल्लेखनीय है कि महेश यादव का तबादला जून 2025 में सीहोर से बालाघाट कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने इस तबादले के खिलाफ न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया, जिसके आधार पर वे अभी भी सीहोर में ही कार्यरत हैं। आयुक्त ने उन्हें पद से हटाने और दिव्यांगता सर्टिफिकेट की जांच एम्स में कराने के निर्देश दिए हैं। यह पत्र सीहोर कलेक्टर को भेजा गया है, लेकिन फिलहाल महेश यादव को पद से नहीं हटाया गया है। इस संबंध में, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, सीहोर के प्रभारी उपसंचालक महेश यादव ने कहा कि वे अभी बाहर हैं और इस मामले पर अधिक टिप्पणी नहीं कर सकते।


