हनुमानगढ़ में खुशाल दास विश्वविद्यालय में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर पारंपरिक हवन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और कर्मचारियों ने भाग लिया। सभी ने हवन कुंड में विधिवत आहुतियां अर्पित कीं और सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और आपसी सद्भाव को मजबूत करना था। इस दौरान मौजूद सभी सदस्यों ने सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों को भारतीय परंपराओं से जोड़ते हैं। इससे आपसी भाईचारा और सामूहिक चेतना मजबूत होती है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर यज्ञ-हवन का विशेष महत्व है। इस अवसर पर तिल, गुड़ और गेहूं से दी गई आहुतियां सूर्य देव को समर्पित होती हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। पंडित रतनलाल शास्त्री ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि हवन के दौरान सूर्य गायत्री मंत्र और ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसे मंत्रों के जाप से जीवन में तेज, ऊर्जा और सफलता की प्राप्ति होती है।


