चूरू में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मौसम साफ रहने के कारण आसमान दिनभर रंगीन पतंगों से सजा रहा। “वो काटा वो लूटा” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। युवाओं की टोलियां दिनभर घरों की छतों पर डीजे सिस्टम लगाकर गानों का आनंद लेते हुए पतंगबाजी में मशगूल रहीं। सुबह से ही अच्छी धूप निकलने के कारण पतंगबाजों में उत्साह देखा गया। घरों में मातृ शक्तियों ने अनेक लोक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया। इनमें भाभी द्वारा देवर को घेवर देकर जगाना, बहू द्वारा ससुर को मनाना, और बहुओं द्वारा सास को पेड़ियों से उतारने जैसे रिवाज शामिल थे। देवरानी-जेठानी से जुड़े अन्य लोक रीति-रिवाजों का भी पालन किया गया। सुबह घर की मुखिया ने अपनी बहू-बेटियों को एकादशी और मकर संक्रांति की कथाएं सुनाईं। बहुओं ने दान-पुण्य के रूप में तिल के लड्डू और घेवर आदि देकर बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सुबह के समय घरों की रसोई पकौड़े, बड़े और गुलगुले की खुशबू से महक उठी, जिससे पर्व का माहौल और भी खुशनुमा हो गया। हालांकि, चूरू में जगह-जगह चीनी मांझे के उपयोग के कारण राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, बाजार में मिठाई की दुकानों पर घेवर और फीणी खरीदने वालों की दिनभर भीड़ लगी रही।


