छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और पोषण सुरक्षा के लिए जरूरी फोर्टिफाइड राइस कर्नेल- एफआरके के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। साल 2025–26 के लिए मार्कफेड द्वारा जारी टेंडर में एक हफ्ते के भीतर ऐसा बदलाव कर दिया गया जिससे 80 फीसदी स्थानीय सप्लायर टेंडर की दौड़ से बाहर हो गए हैं साथ ही 39 रुपए में खरीदे जाने वाले एफआरके की दर 60 रूपए तक पहुंचने की संभावना है। दरअसल मार्कफेड द्वारा 19 दिसंबर 2025 को जारी टेंडर की शर्तों में बदलाव करते हुए 26 दिसंबर को नया टेंडर जारी किया गया जिसमें कई तकनीकी और वित्तीय शर्तें जोड़ी गईं, जिनके कारण छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम एफआरके निर्माता अयोग्य हो गए। बताया गया है कि ऐसा कुछ बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। 84 हजार मीट्रिक टन खरीदने की तैयारी: बताया गया है कि मार्कफेड द्वारा लगभग 84 हजार मीट्रिक टन एफआरके खरीदने की तैयारी की जा रही है। अब तक एफआरके की खरीदी 39 रुपए प्रति किलो की दर से की जाती थी लेकिन नए टेंडर से यह दर 60 रुपए प्रति किलो के उपर पहुंचने की संभावना है। इससे सरकार को सालाना 175 से 200 करोड़ तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इन जिलों की एफआरके इकाइयों पर संकट
रायपुर, धमतरी, दुर्ग – 60 से 70 फीसदी FRK इकाइयों के टेंडर से बाहर होने की आशंका, राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा में 80 फीसदी तक प्लांट बंद होने की कगार पर हैं। रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर-चावल और राइस मिल नेटवर्क प्रभावित, फोर्टिफिकेशन पर संकट। मंत्री, सचिव, एमडी ने नहीं उठाया फोन
इस संबंध में वस्तु स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभागीय मंत्री दयालदास बघेल को तीन से चार बार, विभागीय सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले को लगभग चार बार और मार्कफेड के एमडी को भी दो से तीन बार फोन लगाया गया लेकिन उनकी ओर से कोई रिस्पांस नहीं मिला। पीडीएस और पोषण योजना पर खतरा
एफआरके की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने पर राइस मिलें फोर्टिफाइड चावल तैयार नहीं कर पाएंगी, जिससे गरीबों और बच्चों को मिलने वाला पोषणयुक्त चावल प्रभावित होने की संभावना है। राशन दुकानों में वितरण में देरी और अव्यवस्था बढ़ेगी केंद्र सरकार की फूड फोर्टिफिकेशन योजना भी प्रभावित हो सकती है।


