जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर की छतों पर ‘वो काटा-वो मारा’ का शोर गूंजने लगा। जो देर शाम तक बदस्तूर जारी रहा। दान-पुण्य के साथ शुरू हुए इस पर्व पर शहर का आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से अटा नजर आया। शाम होने के साथ ही लोगों ने छतों पर आतिशबाजी के साथ साथ लोगों ने खुले आकाश में लैंप वाली पतंगों का आनंद लिया। हर वर्ग पर चढ़ा पतंगबाजी का खुमार त्योहार को लेकर युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। न केवल युवा, बल्कि बुजुर्ग और महिलाएं भी छतों पर पतंगबाजी का लुत्फ उठाते नजर आए। मोहल्लों में सुबह से ही छतों पर म्यूजिक सिस्टम लगा दिए गए, जहां फिल्मी गानों की धुन पर लोग थिरकते और पतंगें काटते दिखे। घरों में गृहिणियों ने तिल-गुड़ के लड्डू, फीणी और विशेष पकवान तैयार किए, जिनका आनंद पतंगबाजी के बीच लिया गया। चाइनीज मांझे ने बढ़ाई चिंता, प्रशासन के दावे फेल पर्व के उल्लास के बीच इस वर्ष भी ‘चाइनीज मांझे’ का साया गहरा रहा। हालांकि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस घातक मांझे की बिक्री और उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगा रखा था, लेकिन धरातल पर प्रशासन की सख्ती बेअसर साबित हुई। शहर के कई हिस्सों में युवाओं को धड़ल्ले से नायलॉन और प्लास्टिक मिश्रित धागे (चाइनीज मांझे) का उपयोग करते देखा गया। दान-पुण्य का दौर धार्मिक दृष्टिकोण से भी दिन विशेष रहा। सुबह सवेरे श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन किए और गौशालाओं में गायों को हरा चारा व लापसी खिलाकर पुण्य कमाया। शहर के प्रमुख चौराहों पर जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र और खिचड़ी वितरण के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।


