बलरामपुर जिले में 655 करोड़ के विकास कार्य होंगे:तातापानी महोत्सव में CM साय की घोषणा; हॉस्टल-भवन, सरकारी दफ्तर बनेंगे

बलरामपुर रामानुजगंज जिले में मकर संक्रांति के अवसर पर 3 दिवसीय प्रसिद्ध तातापानी महोत्सव की शुरुआत हो गई है। पहले दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। उन्होंने तपेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में स्थित प्राचीन शिव चबूतरे पर पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद सीएम ने 60 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा के पास पतंग भी उड़ाई। वहीं, मुख्यमंत्री ने जिले में 655 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन भी किया। इसके साथ ही हॉस्टल, भवन, सरकारी दफ्तर बनाने की घोषणा भी की। जिले में होंगे करोड़ों के विकास कार्य मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिले को 655 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों को उपज का उचित मूल्य, महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये और 5 लाख से अधिक भूमिहीन किसानों को सहायता राशि प्रदान करने का उल्लेख किया। रामलला दर्शन योजना से अब तक 40 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। आयोजन के लिए हर साल दी जाएगी 25 लाख की राशि मुख्यमंत्री ने चार प्रमुख घोषणाएं भी कीं। इनमें बलरामपुर जिला मुख्यालय में शासकीय महिला कर्मचारियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल, डाइट संचालन के लिए भवन, जिला पंजीयन कार्यालय भवन और तातापानी महोत्सव के आयोजन हेतु प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करना शामिल है। 200 जोड़ों का सामूहिक विवाह भी हुआ तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री साय ने विशाल जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने मकर संक्रांति को सूर्य उपासना का पर्व बताया, जो भारतीय संस्कृति, एकजुटता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने तातापानी को आस्था का प्रमुख केंद्र बताते हुए श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना की और मकर संक्रांति, लोहड़ी तथा पोंगल पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत विवाह बंधन में बंधे 200 जोड़ों को भी नवदांपत्य जीवन की शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री ने अलग-अलग विभागों द्वारा लगाए गए 25 स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प, आदिवासी व्यंजन और नवाचारों की सराहना की। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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