सीएम मान के बयान पर अमरीख बलुआ की प्रेस वर्ता:बोले-सीएम का बयान गुमराह करने वाला, 169 स्वरूपों का पूरा रिकॉर्ड

नवांशहर के ऐतिहासिक धार्मिक स्थान ‘रसोखाना श्री नाभ कंवल राजा साहिब’ की मैनेजमेंट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने 328 लापता स्वरूपों में से 169 स्वरूप यहां होने की बात कही थी। मैनेजमेंट के प्रवक्ता अमरीख सिंह बलुआ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री के बयान को तथ्यहीन और गुमराह करने वाला करार देते हुए अकाल तख्त साहिब की पेशी से ध्यान भटकाने की साजिश बताया। मुख्यमंत्री के दावों का तथ्यों के साथ खंडन अमरीख सिंह बलुआ ने प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए 169 स्वरूपों का लापता हुए 328 स्वरूपों से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि इनमें से 79 स्वरूप शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी SGPC द्वारा 1978 से 2012 के बीच प्रकाशित किए गए थे, जबकि लापता स्वरूपों का विवाद साल 2014 से 2019 के बीच का है। ऐसे में पुराने स्वरूपों को इस विवाद से जोड़ना तर्कहीन है। प्रिंटिंग प्रेस और संगत द्वारा भेंट किए गए स्वरूप मैनेजमेंट ने बताया कि संस्थान में मौजूद 62 स्वरूप साल 1998 से भी पहले के हैं, जिन्हें निजी प्रिंटिंग प्रेसों द्वारा छापा गया था। उस समय संगत अपनी मर्जी से ये स्वरूप खरीदकर श्रद्धा के साथ यहां भेंट करती थी। केवल 30 स्वरूप से हैं जो 2014-2019 की समय सीमा के भीतर आते हैं, लेकिन उनका भी पूरा आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है। ये स्वरूप SGPC से पुराने स्वरूप जमा करवाकर विधिवत रसीद के साथ प्राप्त किए गए थे। संस्थान की छवि बिगाड़ने का आरोप बलुआ जी ने भावुक होते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पावन स्थान को पाखंडी डेरा की तरह पेश करने की कोशिश की है, जिससे दुनिया भर में बसी सिख संगत की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि “रसोखाना मझारा राजा साहिब” एक सेवा का केंद्र है जहां चौबीस घंटे लंगर चलता है, अस्पताल संचालित होते हैं और मानवता की भलाई के लिए आंखों के कैंप लगाए जाते हैं। मुख्यमंत्री का बयान न केवल गलत है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था की स्थिति को खराब करने वाला भी हो सकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस और SIT की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। बलुआ जी ने कड़ा एतराज जताया कि सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी सचखंड में कैसे दाखिल हो सकते हैं? उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी मुलाजिम को गुरु महाराज की मर्यादा को भंग करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार साहब से मांग की है कि वे स्वयं एक उच्च-स्तरीय धार्मिक टीम भेजकर यहां की मर्यादा और सत्कार की जांच करवाएं।

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