परिवहन विभाग की ओर से जिले का फिटनेस सेंटर जिला मुख्यालय से करीब 35–40 किलोमीटर दूर निंबाहेड़ा क्षेत्र में शुरू किए जाने से ऑटो चालकों में नाराजगी है। इसी को लेकर भारतीय ऑटो चालक यूनियन से जुड़े कई चालक गुरुवार को जिला कलेक्टर से मिलने पहुंचे और अपनी समस्या रखी। ऑटो चालकों का कहना है कि जिला मुख्यालय पर फिटनेस सेंटर नहीं होने से उन्हें मजबूरी में 40 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है, जिससे समय, पैसा और रोजी-रोटी तीनों पर असर पड़ रहा है। चालकों ने मांग की कि जिला मुख्यालय पर ही फिटनेस सेंटर फिर से शुरू किया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके। पहले थे जिला मुख्यालय पर ही फिटनेस सेंटर, अब हुए बंद ऑटो चालक यूनियन के अध्यक्ष जसपाल सिंह ने बताया कि पहले जिले में पहले जिला मुख्यालय पर फिटनेस सेंटर संचालित थे, जिससे ऑटो चालकों को आसानी होती थी। बाद में सरकार द्वारा ये सेंटर बंद कर दिए गए। इसके बाद कुछ समय तक फिटनेस परिवहन विभाग के कार्यालय में की जा रही थी, जिससे स्थिति संभली हुई थी। हालांकि 31 दिसंबर से वह व्यवस्था भी बंद कर दी गई। इसके बाद अब नया फिटनेस सेंटर निंबाहेड़ा के पास रानीखेड़ा में खोला गया है, जो जिला मुख्यालय से काफी दूर है। इस फैसले से जिलेभर के ऑटो चालकों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महंगा, समय लेने वाला और जोखिम भरा हो सकता है सफर ऑटो चालकों का कहना है कि फिटनेस कराने के लिए निंबाहेड़ा जाना उनके लिए महंगा और जोखिम भरा साबित हो रहा है। वहां पहुंचने में आने-जाने का खर्च अलग से उठाना पड़ता है और पूरा दिन इसी में निकल जाता है, जिससे दिनभर की आमदनी भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा सरकारी फिटनेस शुल्क 1300 रुपए है, लेकिन वहां करीब 300 रुपए तक की अतिरिक्त रसीद का बोझ भी पड़ता है। कई चालकों ने बताया कि इतनी दूरी तय करते समय गाड़ी खराब होने या सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, जिससे डर और तनाव बढ़ जाता है। परमिट सीमा से बाहर जाने का डर ऑटो चालकों की सबसे बड़ी चिंता उनके परमिट को लेकर है। चालकों का कहना है कि ऑटो का परमिट सिर्फ नगरपरिषद क्षेत्र तक ही मान्य होता है। ऐसे में 35–40 किलोमीटर बाहर जाकर फिटनेस कराना नियमों के खिलाफ भी पड़ सकता है। अगर रास्ते में कोई हादसा हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह स्पष्ट नहीं है। चालकों का आरोप है कि ऐसी स्थिति में परिवहन विभाग जिम्मेदारी लेने से बच सकता है, जिससे ऑटो चालक पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फिटनेस अवधि भी बनी परेशानी की वजह ऑटो चालकों ने बताया कि फिटनेस की अवधि गाड़ी के मॉडल के अनुसार तय होती है। बड़े मॉडल के ऑटो की फिटनेस दो साल में और छोटे मॉडल के ऑटो की फिटनेस एक साल में करानी होती है। मौजूदा व्यवस्था में हर बार इतनी दूर जाकर फिटनेस कराना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है। इसी कारण ऑटो चालकों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि राजस्थान सरकार और परिवहन विभाग स्थानीय स्तर पर, यानी जिला मुख्यालय पर ही फिटनेस सेंटर दोबारा शुरू करे, ताकि सैकड़ों ऑटो चालकों को राहत मिल सके। आरटीओ का पक्ष, बोले – कोर्ट के आदेश के बाद खुला सेंटर आरटीओ नेमीचंद पारीक ने बताया कि करीब छह महीने पहले जिले पर जयपुर परिवहन विभाग मुख्यालय से फिटनेस सेंटर बंद कर दिए गए थे और कोर्ट के आदेश के बाद निंबाहेड़ा फिटनेस सेंटर को दोबारा शुरू किया गया है, इसलिए फिलहाल वहीं फिटनेस करानी होगी। बंद होने के बाद लोगों की सुविधा के लिए ऑफिस में फिटनेस करवाया जा रहा था लेकिन अब आदेश निंबाहेड़ा का जारी हुआ है।


