सिकराय SDM और दोषी अफसरों पर 1 लाख का जुर्माना:हाईकोर्ट ने कहा- पेड़ काटने की अनुमति देने और काटने वाले अधिकारियों से वसूला जाए जुर्माना

पंचायत भवन बनाने के लिए बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति और अनुमत संख्या से ज्यादा पेड़ काटने को हाईकोर्ट ने गंभीर माना हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने इसे लेकर तत्कालीन दौसा जिले के सिकराय एसडीएम और अन्य दोषी अधिकारियों पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह आदेश विमला देवी की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि जुर्माना राशि पेड़ों की कटाई में शामिल संबंधित अधिकारियों से वसूली जाए। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए भवनों का निर्माण आवश्यक हो सकता है। लेकिन साथ ही, पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण को बनाए रखने के लिए स्थापित वृक्षों की रक्षा करना भी आवश्यक है।
वास्तव में भवन निर्माण की योजना इस प्रकार बनाई जानी चाहिए कि मौजूदा वृक्षों को कोई नुकसान न पहुंचे। प्रशासन ने 25 की जगह काट दिए 150 पेड़
जनहित याचिका में कहा गया था कि ग्राम पंचायत पाटन का भवन बनाने के लिए तत्कालीन एसडीएम ने बिना अधिकार के पेड़ काटने की अनुमति दे दी। 17 बड़े और मध्यम आकार के पेड़ों और 8 छोटे पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन 25 पेड़ों की अनुमत संख्या के बदले प्रशासन ने 150 से ज्यादा पेड़ काट दिए। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि पंचायत भवन के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई के बदले अलग से भूमि चिह्नित की गई थी और लगभग 500 पेड़ लगाए गए हैं। इस पर अदालत ने कहा- संबंधित एसडीएम ने वृक्षों की कटाई के लिए किसी भी प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली है। वहीं किसी अन्य स्थान पर पौधे लगाने की कार्रवाई, वृक्षों की बड़े पैमाने पर कटाई को उचित ठहराने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती हैं। पेड़ काटने वालों के खिलाफ होनी चाहिए कड़ी कार्रवाई
अदालत ने कहा कि सरकार की तरफ से एक एफिडेविट पेश किया गया। जिसमें कहा गया था कि उन्होंने केवल 25 पेड़ काटे हैं। हालांकि, रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि यह क्षेत्र घने वन वृक्षों से भरा हुआ था, जिन्हें अवैध रूप से काटा गया है। पेड़ों को काटने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए थी। न केवल उस अधिकारी के खिलाफ जिसने पेड़ों को काटने का अवैध आदेश पारित किया, बल्कि उन समस्त अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने अवैध आदेश की पालना की है। पेड़ों के रखरखाव में काम ली जाए जुर्माना राशि
अदालत ने कहा कि इस जनहित याचिका के दायर होने के बाद वर्तमान एसडीएम ने नए पौधे लगाने का प्रयास किया है, जो बड़े हो गए हैं और उनकी तस्वीरें भी हमारे सामने रखी गई है। जो दर्शाती है कि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान कार्रवाई की सराहना करते हुए हम आगे निर्देश देते हैं कि इन पौधों की समय-समय पर निगरानी की जाए और पौधों को भविष्य में मजबूत वृक्षों के रूप में विकसित होने के लिए संरक्षित किया जाए। वहीं जुर्माना राशि अब उग चुके इन पौधों के रखरखाव के लिए उपयोग में ली जाए। साथ ही इन पौधों की सुरक्षा के लिए वृक्ष रक्षक भी लगाए जाए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *