राज्यव्यापी बाघ आकलन अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से वन विकास निगम के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों के लिए बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य अखिल भारतीय बाघ आकलन के क्रियान्वयन के लिए कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों से सुसज्जित करना था, जिससे डेटा संग्रहण और निगरानी प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके। कार्यशाला के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों ने निगम के कर्मचारियों को ‘सेलैस ऐप’ के तकनीकी पहलुओं से विस्तार से अवगत कराया। यह ऐप डेटा रिकॉर्डिंग, जियो-टैगिंग और वास्तविक समय में सूचना भेजने की सुविधा प्रदान करता है। सैद्धांतिक सत्र में ऐप और डेटा प्रोटोकॉल की जानकारी सैद्धांतिक सत्र में ऐप के उपयोग, डेटा दर्ज करने के प्रोटोकॉल और संभावित चुनौतियों के समाधान पर चर्चा की गई। सिद्धांत की जानकारी के बाद, प्रशिक्षण का दूसरा चरण व्यावहारिक रहा। इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को वन क्षेत्र में ले जाकर ऐप का हाथों-हाथ प्रयोग सिखाया गया। फील्ड प्रशिक्षण में तकनीकी शंकाओं का समाधान और कार्य निर्देश फील्ड प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों की तकनीकी शंकाओं का तुरंत समाधान किया गया और उन्हें व्यवस्थित व योजनाबद्ध तरीके से गणना कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। वरिष्ठ अधिकारियों ने आगामी बाघ आकलन में एकत्र किए जाने वाले डेटा की शुद्धता और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया। तकनीकी दक्षता से संरक्षण नीतियों को मजबूती उन्होंने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि तकनीकी दक्षता न केवल डेटा को विश्वसनीय बनाएगी, बल्कि इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए ठोस नीतिया बनाने में भी मदद मिलेगी। अखिल भारतीय बाघ आकलन का यह कार्यक्रम वर्तमान में पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। प्रदेशभर में जारी अखिल भारतीय बाघ आकलन अभियान इसी क्रम में राज्य के सभी वन्यजीव अभयारण्यों और वन मंडलों में इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाना है। इस प्रशिक्षण से वनकर्मियों के कौशल में वृद्धि होने और आधुनिक तकनीक के उपयोग से बाघ गणना कार्य में अधिक दक्षता आने की उम्मीद है।


