धान समितियों से 22 करोड़ का फर्जीवाड़ा:14 जिलों में राइस मिलर्स ने की गड़बड़ी, 795 ट्रकों से एक ही समय में दो बार उठाया धान

कवर्धा और महासमुंद में करीब 12 करोड़ का धान चूहों के खाने के बाद अब नया फर्जीवाड़ा सामने आया है। राइस मिलर्स ने अपनी क्षमता से ज्यादा धान का उठाव किया और बोनस के लिए उसे समितियों में वापस बेच दिया। बदले में मिली बोनस की रकम मिलकर बांट ली गई। प्रदेश के 14 जिलों में धान खरीदी केंद्रों और राइस मिलर्स की मिलीभगत से 71,550 क्विंटल धान की हेराफेरी की गई है। इस तरह 22 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसके बाद अफसरों ने हर जिले के कलेक्टर को जांच का आदेश दिया है। इसी मामले में मुंगेली में 4 राइस मिल सील कर दी गई है। मामला सामने आने के बाद मार्कफेड के अधिकारियों ने जांच के लिए एआई का सहारा लिया। जांच में साबित हुआ कि मुंगेली में 207, बिलासपुर में 47, धमतरी में 36, बलौदाबाजार में 33 और सक्ती में 32 ट्रकों में एक ही समय में दो बार धान का उठाव किया गया है। यानी गाड़ी नंबर एक, लेकिन उसकी एंट्री उसी समय में दो बार की गई है। मुंगेली में 15 से ज्यादा राइस मिलर्स ने सेवा सहकारी समिति के धान खरीदी केंद्रों से 207 ट्रकों में क्षमता से दोगुना ज्यादा धान उठा लिया। इसी तरह मुंगेली के उपलता राइस मिलर ने 57 बार एक ही धान खरीदी केंद्र से एक ही ट्रक नंबर में अलग-अलग तरीकों में एक ही समय में दो बार धान उठाया। धान की ओवरलोडिंग पर 6 राइस मिलरों और 7 समिति प्रबंधकों को नोटिस धान समिति केंद्रों से धान का फर्जीवाड़ा की खबर फैलने के साथ ही रायपुर में बुधवार को एक साथ कई राइस मिलों में छापे मारे गए। ओवरलोडिंग पर मिलरों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। खाद्य विभाग के अफसरों ने बताया कि उपार्जन केंद्रों से धान परिवहन में लगी गाड़ियों में दोगुना तक धान लादा जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने पर जय शंकर इंडस्ट्रीज, किशन एग्रो इंडस्ट्रीज,मां गायत्री इंडस्ट्रीज, ग्रीन एग्री कार्पो प्रालि, छापरियां एग्रो इंडस्ट्रीज, गुरुनानक इंडस्ट्रीज राइस मिल को नोटिस जारी किया गया है। वहीं, उपार्जन केंद्र टण्डवा, नरदहा, पटेवा, भैंसा, कोसरंगी, सिवनी तथा बिलाडी के समिति प्रबंधक व अध्यक्ष को भी संबंधित मिलर्स के वाहनों को ओवरलोड करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अफसरों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह साफ पता चल रहा है कि सेजा, सिवनी, फरहदा, लखौली, टाटीबंध, कुंरा, गनौद, बरतोरी, खौली, देवरी, तामासिवनी को किसानों के प्लास्टिक बोरे से समिति के जूट बोरे में सीधे पलटी की जा रही थी। ये गलत है। अपर कलेक्टर कीर्तिमान राठौर ने बताया कि जीपीएस तकनीक से परिवहन वाहनों की ट्रेकिंग की जा रही है। एआई सिस्टम से जांच, फिर खुलासा
धान की एंट्री कराते समय भी फर्जीवाड़ा हुआ है। समितियों के कंप्यूटर ऑपरेटर्स ने एक गाड़ी में 30 क्विंटल की जगह 300 क्विंटल धान की एंट्री कर दी। ऐसा एक बार नहीं कई बार किया गया। मार्कफेड वालों ने एआई सिस्टम से इस फर्जीवाड़े को पकड़ा। एआई सिस्टम ने बताया कि कैसे एक ही गाड़ी से बार-बार धान का उठाव किया गया है। इसके बाद ही गाड़ी और राइस मिलरों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की गई। अब समझिए… फर्जीवाड़ा कैसे और फायदा किस-किस को हुआ
सभी राइस मिलरों को उनकी क्षमता के अनुसार धान उठाना होता है, ताकि वे समय पर कस्टम मिलिंग का चावल सरकार को लौटा सकें। राज्य के करीब 800 राइस मिलर्स ने धान समिति केंद्रों के साथ मिलकर अपनी क्षमता से ज्यादा धान उठा लिया। वे एक ट्रक की एंट्री करते थे और एक ही समय पर उसी गाड़ी नंबर से दो से पांच बार तक धान उठाते थे। जितनी बार धान उठता समिति के अधिकारी किसानों से ऋण पुस्तिका लेकर उसकी ऑनलाइन एंट्री कर देते। धान की एंट्री होने के बाद किसानों के खाते में 2400 रुपए क्विंटल से एंट्री की जाती और बोनस के प्रति क्विंटल 700 रुपए की राशि राइस मिलर्स और समिति के अधिकारी आपस में बांट लेते। इन राइस मिलर्स ने किया फर्जीवाड़ा मुंगेली : उपलता राइस मिल {एसएन फूड {जनता राइस मिल {जैन राइस मिल {वर्धमान राइस मिल {केजीएन राइस मिल {शिव राइस प्रोडक्ट {जीके इंडस्ट्री {नेशनल दाल मिल {गायत्री फूड प्रोडक्ट {जय बजरंग राइस मिल {छाबड़ा राइस इंडस्ट्री {सरदार जी राइस मिल धमतरी: लक्ष दातार राइस मिल {महाराज अग्रसेन राइस {भगवती राइस मिल अजय ट्रेडिंग कंपनी जांजगीर चांपा: शारदा राइस इंडस्ट्री बलौदाबाजार: राहुल राइस मिल {सार्थक इंडस्ट्री बेमेतरा:गिरिराज राइस मिल कवर्धा: श्री कृष्ण एग्रो {श्रेयांस ट्रेडर्स बिलासपुर: राघव राइस इंडस्ट्री {हरिओम राइस मिल {मां कैलाशवती एग्रो फूड {कनक कपीश राइस मिल सरगुजा: आलोक राइस मिल जशपुर: जीन माता राइस मिल मानपुर: केटीसी राइस मिल बालोद: अंग मैया पोहा एंड मुर्रा। राज्य के कई जिलों में यह गड़बड़ी सामने आई है कि एक ही गाड़ी से लाखों क्विंटल धान समितियों से बाहर ले जाया गया है। गड़बड़ी करने वालों से पूरी वसूली की जाएगी। सभी जिलों के कलेक्टर इसकी जांच कर रहे हैं। मिलरों पर कार्रवाई भी शुरू हो गई है। -जितेंद्र शुक्ला, एमडी छत्तीसगढ़ मार्कफेड

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