JLF में जावेद अख्तर बोले-सेक्युलर का क्रैश कोर्स नहीं होता:संस्कृत हजारों साल पुरानी, उर्दू कल की बच्ची; रीजन की भाषा होती है, रिलीजन की नहीं

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में बॉलीवुड गीतकार-स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने कहा- सेक्युलर का कोई क्रैश कोर्स नहीं होता। कोई सिखाएगा तो वो फेक होगा। सेक्युलर आपको आपके आसपास के माहौल से मिलता है। मुझे यह सब नाना और नानी से मिला। जावेद अख्तर ने कहा- संस्कृत पहले आई या उर्दू, यह सवाल ही गलत है। संस्कृत हजारों साल पुरानी है, उर्दू तो कल की बच्ची है। तमिल सबसे पुरानी जिंदा लैंग्वेज है। उर्दू रेस में ही नहीं है। चश्मा क्यों नहीं लगा, इस पर अख्तर ने कहा कि अच्छे चेहरों को देखें, अच्छी नीयत रखें। चश्मा नहीं लगेगा। सेशन ‘जावेद अख्तर: पॉइंट्स ऑफ व्यू’ में उनके साथ राइटर वरीशा फरासत ने बातचीत की। वहीं सेशन ‘इंडिया इन उर्दू : उर्दू इन इंडिया’ में जावेद अख्तर ने कहा- उर्दू जुबान ने पाकिस्तान के टुकड़े करवाए। भारत में बसे लोग जो उर्दू को ही अपना मानते हैं, वो तनाव बनाकर रखते हैं। भाषा कभी भी धर्म, समाज की भाषा हो ही नहीं सकती। रीजन की भाषा होती है, रिलीजन की नहीं। इससे पहले होटल क्लार्क्स आमेर में गुरुवार को JLF की शुरुआत ‘मॉर्निंग म्यूजिक: नाद- बिटवीन साउंड एंड साइलेंस’ से हुई। इसमें ऐश्वर्या विद्या रघुनाथन ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। सीएम भजनलाल शर्मा, डिप्टी सीएम दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने आयोजकों के साथ फेस्टिवल का उद्घाटन किया। फेस्टिवल में 500 से ज्यादा राइटर्स शामिल होंगे
JLF में दुनियाभर से 500 से ज्यादा राइटर्स शामिल होंगे। फेस्टिवल में 5 दिन तक टेक्नोलॉजी, साहित्य, राजनीति, खेल, इतिहास, सिनेमा, ग्लोबल अफेयर्स जैसे विषयों पर डिस्कशन होंगे। बांग्लादेश और वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा होगी। 17 जनवरी तक म्यूजिक स्टेज होगा, जिसमें अलग-अलग तरह के म्यूजिक की परफॉर्मेंस होगी। देखिए, JLF की PHOTOS… JLF की पल-पल की अपडेट के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

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